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पुराना नियम और नया नियम क्या हैं? | बाइबल प्रशिक्षण

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बाइबल प्रशिक्षण • पाठ 2

पुराना नियम और नया नियम क्या हैं?

बाइबल के दो मुख्य भागों को समझें और जानें कि वे परमेश्वर की उद्धार-योजना को कैसे प्रकट करते हैं।

📖 बाइबल अध्ययन ⏱️ लगभग 15–20 मिनट 📝 अभ्यास प्रश्न

इस पाठ में आप क्या सीखेंगे?

  • पुराने नियम और नए नियम का अर्थ।
  • बाइबल की 66 पुस्तकों का विभाजन।
  • दोनों नियमों के मुख्य विषय और उनका आपसी संबंध।
  • यीशु मसीह और नए नियम की केंद्रीय भूमिका।
  • बाइबल पढ़ते समय इन दोनों भागों को सही संदर्भ में समझना।

1. बाइबल के दो मुख्य भाग

प्रचलित प्रोटेस्टेंट बाइबल में कुल 66 पुस्तकें हैं। इन्हें दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है—पुराना नियम और नया नियम। ये दोनों मिलकर परमेश्वर के कार्यों, मनुष्य की स्थिति, उद्धार की आशा और परमेश्वर के साथ संबंध की कहानी प्रस्तुत करते हैं।

39

पुराना नियम

सृष्टि, इस्राएल का इतिहास, व्यवस्था, भजन, ज्ञान-साहित्य और भविष्यद्वक्ताओं के संदेश।

उत्पत्ति से मलाकी तक — प्रोटेस्टेंट बाइबल के क्रम में।

27

नया नियम

यीशु मसीह का जीवन और शिक्षा, उनकी मृत्यु और पुनरुत्थान, कलीसिया की शुरुआत और प्रेरितों की शिक्षाएँ।

मत्ती से प्रकाशितवाक्य तक।

ध्यान दें: बाइबल की पुस्तकों की संख्या अलग-अलग ईसाई परंपराओं में भिन्न हो सकती है। यहाँ 66 पुस्तकों वाली प्रोटेस्टेंट बाइबल को आधार बनाया गया है।

2. पुराना नियम क्या है?

पुराना नियम बाइबल का पहला भाग है। इसमें सृष्टि की शुरुआत, मनुष्य का पाप में गिरना, परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ, इस्राएल जाति का इतिहास, परमेश्वर की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं के संदेश दर्ज हैं।

यह हमें परमेश्वर के स्वभाव, उसकी पवित्रता, न्याय, दया और मनुष्य के साथ उसके संबंध के बारे में सिखाता है। इसमें आने वाले उद्धारकर्ता की आशा भी दिखाई देती है।

पुराने नियम के मुख्य भाग

  1. व्यवस्था की पुस्तकें: उत्पत्ति, निर्गमन, लैव्यव्यवस्था, गिनती और व्यवस्थाविवरण। इनमें सृष्टि, पितृपुरुषों, इस्राएल की मुक्ति और व्यवस्था का वर्णन है।
  2. ऐतिहासिक पुस्तकें: यहोशू से एस्तेर तक की पुस्तकें इस्राएल के इतिहास के विभिन्न चरणों को दिखाती हैं।
  3. काव्य और ज्ञान-साहित्य: अय्यूब, भजन संहिता, नीतिवचन, सभोपदेशक और श्रेष्ठगीत जैसे ग्रंथ।
  4. भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकें: यशायाह, यिर्मयाह, यहेजकेल, दानिय्येल और अन्य भविष्यद्वक्ताओं के संदेश।
मुख्य संदर्भ — 2 तीमुथियुस 3:16–17

यह अंश बताता है कि पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से है और शिक्षा, समझाने, सुधारने तथा धार्मिकता की शिक्षा देने में उपयोगी है।

3. नया नियम क्या है?

नया नियम बाइबल का दूसरा भाग है। इसमें यीशु मसीह के जीवन, उनकी शिक्षाओं, क्रूस पर मृत्यु, पुनरुत्थान और उनके अनुयायियों द्वारा सुसमाचार के प्रचार का वर्णन मिलता है।

यह दिखाता है कि पहली शताब्दी में कलीसिया कैसे विकसित हुई और प्रेरितों ने अलग-अलग समुदायों को विश्वास, प्रेम, पवित्र जीवन और मसीही आशा के बारे में क्या सिखाया।

नए नियम के मुख्य भाग

  1. चार सुसमाचार: मत्ती, मरकुस, लूका और यूहन्ना—यीशु के जीवन और शिक्षा का वर्णन।
  2. प्रेरितों के काम: आरंभिक कलीसिया और सुसमाचार के फैलने का इतिहास।
  3. पत्रियाँ: रोमियों से यहूदा तक के पत्र, जिनमें विश्वास और मसीही जीवन की शिक्षा दी गई है।
  4. प्रकाशितवाक्य: दर्शन और प्रतीकों के माध्यम से न्याय, आशा और परमेश्वर की अंतिम विजय का संदेश।
मुख्य संदर्भ — लूका 24:27

यीशु ने मूसा और सब भविष्यद्वक्ताओं से शुरू करके पवित्रशास्त्र में अपने विषय की बातें समझाईं। यह दिखाता है कि पुराने नियम को यीशु की शिक्षा के संदर्भ में भी पढ़ा जाता है।

4. पुराने और नए नियम में क्या अंतर है?

विषयपुराना नियमनया नियम
मुख्य केंद्रसृष्टि, प्रतिज्ञाएँ, इस्राएल और व्यवस्थायीशु मसीह और सुसमाचार
इतिहासमसीह के पृथ्वी पर आने से पहले की घटनाएँयीशु का जीवन और आरंभिक कलीसिया
मुख्य संदेशपरमेश्वर की पवित्रता, प्रतिज्ञाएँ और उद्धार की आशामसीह में उद्धार, विश्वास और नया जीवन
याद रखें: “पुराना” होने का अर्थ यह नहीं कि पुराना नियम बेकार या महत्वहीन है। दोनों नियमों को उनके संदर्भ में पढ़ना चाहिए। नया नियम पुराने नियम के अनेक विषयों और प्रतिज्ञाओं से जुड़ता है।

5. दोनों नियम एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं?

बाइबल को दो असंबंधित किताबों की तरह नहीं, बल्कि परमेश्वर के कार्यों की एक बड़ी कहानी के रूप में पढ़ना उपयोगी है। पुराने नियम में प्रतिज्ञाएँ, प्रतीक, इतिहास और आशाएँ हैं। नया नियम यीशु मसीह के जीवन और कार्य के प्रकाश में इन विषयों को समझने में मदद करता है।

  • सृष्टि: उत्पत्ति 1:1 में सृष्टि की शुरुआत का वर्णन है।
  • पाप और मनुष्य की आवश्यकता: उत्पत्ति 3 मनुष्य के पतन का वर्णन करता है।
  • प्रतिज्ञा: उत्पत्ति 12:1–3 में अब्राहम से संबंधित प्रतिज्ञा दी गई है।
  • यीशु की भूमिका: यूहन्ना 1:29 में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला यीशु को संसार के पाप उठाने वाले परमेश्वर के मेम्ने के रूप में पहचानता है।
  • नई आशा: प्रकाशितवाक्य 21:1–4 में नई सृष्टि और दुःख के अंत की आशा दिखाई गई है।

6. बाइबल पढ़ते समय क्या ध्यान रखें?

  1. पहले जानें कि पुस्तक किस समय, किन लोगों और किन परिस्थितियों से संबंधित है।
  2. किसी पद को उसके आसपास के वाक्यों और पूरे अध्याय के साथ पढ़ें।
  3. इतिहास, कविता, भविष्यवाणी और पत्र—इनकी अलग-अलग लेखन शैलियों को पहचानें।
  4. पुराने नियम के किसी आदेश को सीधे आज लागू करने से पहले उसका संदर्भ और नए नियम की शिक्षा समझें।
  5. जो बात स्पष्ट न हो, उसे तुरंत निष्कर्ष मानने के बजाय संदर्भ और विश्वसनीय अध्ययन-सामग्री से जाँचें।

7. इस पाठ का सारांश

  • प्रोटेस्टेंट बाइबल में 39 पुराने नियम की और 27 नए नियम की पुस्तकें हैं।
  • पुराना नियम सृष्टि, इस्राएल के इतिहास, व्यवस्था, ज्ञान और भविष्यद्वक्ताओं के संदेशों को प्रस्तुत करता है।
  • नया नियम यीशु मसीह, उनके उद्धार-कार्य, आरंभिक कलीसिया और प्रेरितों की शिक्षाओं पर केंद्रित है।
  • दोनों नियम आपस में जुड़े हैं और बाइबल के संदेश को समझने में एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
आज का अभ्यास: उत्पत्ति 1:1, भजन संहिता 23:1, लूका 24:27 और यूहन्ना 1:29 पढ़ें। हर संदर्भ से एक बात लिखें जो आपने सीखी।

8. अभ्यास प्रश्न

पहले प्रश्नों के उत्तर स्वयं देने की कोशिश करें। उत्तर-कुंजी अंत में दी गई है।

1. प्रोटेस्टेंट बाइबल में कुल कितनी पुस्तकें हैं?
  1. 39
  2. 27
  3. 66
  4. 73
2. पुराने नियम में कितनी पुस्तकें हैं?
  1. 27
  2. 39
  3. 40
  4. 66
3. नए नियम में कितनी पुस्तकें हैं?
  1. 12
  2. 39
  3. 27
  4. 66
4. यीशु के जीवन और शिक्षा का वर्णन किन पुस्तकों में विशेष रूप से मिलता है?
  1. चार सुसमाचारों में
  2. केवल भजन संहिता में
  3. केवल उत्पत्ति में
  4. केवल प्रकाशितवाक्य में
5. प्रेरितों के काम मुख्य रूप से किसका वर्णन करता है?
  1. सृष्टि की शुरुआत
  2. आरंभिक कलीसिया का इतिहास
  3. केवल इस्राएल के राजाओं का इतिहास
  4. केवल भजनों का संग्रह
6. क्या पुराने नियम को महत्वहीन समझकर छोड़ देना चाहिए?
  1. हाँ, क्योंकि वह पुराना है
  2. हाँ, क्योंकि उसमें कोई शिक्षा नहीं
  3. नहीं, उसे उसके संदर्भ में पढ़ना चाहिए
  4. केवल भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकें पढ़नी चाहिए
7. लूका 24:27 के अनुसार यीशु ने किस विषय में पवित्रशास्त्र से समझाया?
  1. केवल रोमी साम्राज्य के विषय में
  2. अपने विषय की बातों के विषय में
  3. केवल मंदिर के निर्माण के विषय में
  4. केवल राजाओं के विषय में
8. बाइबल के किसी पद को समझने का अच्छा तरीका क्या है?
  1. उसे संदर्भ से अलग पढ़ना
  2. केवल शीर्षक पढ़ना
  3. उसके आसपास के वाक्यों और अध्याय को देखना
  4. हर पद का अर्थ एक जैसा मानना
उत्तर-कुंजी देखें

1. C — 66: 39 पुराने नियम की और 27 नए नियम की पुस्तकें।

2. B — 39: प्रोटेस्टेंट बाइबल के पुराने नियम में 39 पुस्तकें हैं।

3. C — 27: नए नियम में 27 पुस्तकें हैं।

4. A — चार सुसमाचार: मत्ती, मरकुस, लूका और यूहन्ना।

5. B — आरंभिक कलीसिया का इतिहास: इसमें सुसमाचार के फैलने का भी वर्णन है।

6. C — संदर्भ में पढ़ना: पुराना नियम बाइबल की समझ के लिए महत्वपूर्ण है।

7. B — यीशु के विषय में: लूका 24:27 इसी बात का उल्लेख करता है।

8. C — आसपास का संदर्भ: इससे पद का अर्थ बेहतर समझा जा सकता है।

अगला कदम

इस पाठ को पूरा करने के बाद अगले दिन चर्चा में भाग लें। चर्चा का उद्देश्य केवल उत्तर याद करना नहीं, बल्कि बाइबल के दोनों भागों के महत्व को समझना है।

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ध्यान दें: चर्चा पेज का URL प्रकाशित करने से पहले सत्यापित करें।

यह पाठ बाइबल अध्ययन के लिए शैक्षिक सामग्री है। अलग-अलग ईसाई परंपराओं में पुस्तकों की सूची और कुछ व्याख्याओं में अंतर हो सकता है।

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Apostle Vinod Kumar

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