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रोमियों अध्याय 12 — बाइबल पाठ, व्याख्या और मुख्य शिक्षाएँ

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01

अधिकारियों के प्रति उचित अधीनता

पद 1–7

1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 2 इससे जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो॥

अधिकार और जिम्मेदारी
इस भाग में पौलुस अधिकार, व्यवस्था, नागरिक जिम्मेदारी और विवेक को एक साथ रखता है। इसलिए वह केवल अधीनता की बात नहीं करता, बल्कि कर, महसूल, डर और आदर—हर एक का उचित हक चुकाने की बात करता है।
02

प्रेम व्यवस्था की पूर्ति है

पद 8–10

8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है॥

व्यवस्था का सारांश
पौलुस यहाँ विभिन्न आज्ञाओं को एक ही मूल सिद्धान्त में समेटता है—दूसरे से ऐसा प्रेम करना जिसमें उसके प्रति बुराई न की जाए।
03

जागने, ज्योति में चलने और मसीह को पहन लेने का समय

पद 11–14

11 और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुंची है, क्योंकि जिस समय हम ने विश्वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है। 12 रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें। 13 जैसा दिन को सोहता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में। 14 वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो।

जागने का समय
अध्याय का अंतिम भाग विश्वासियों को निष्क्रिय रहने के बजाय जागृत और सचेत जीवन की ओर बुलाता है—अन्धकार के कामों को छोड़कर ज्योति के हथियार धारण करना और प्रभु यीशु मसीह को पहिन लेना।
रोमियों 13 का पूरा flow
उचित अधीनता → नागरिक जिम्मेदारी → प्रेम द्वारा व्यवस्था की पूर्ति → समय को पहचानना → अन्धकार को छोड़ना → ज्योति में चलना → प्रभु यीशु मसीह को पहिन लेना।
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