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रोमियों अध्याय 16 — बाइबल पाठ, व्याख्या और मुख्य शिक्षाएँ

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1

फीबे और विश्वास के सहकर्मियों को नमस्कार

पद 1–7

1मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं। 2कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है॥

3प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार। 4उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। 5और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार। 6मरियम को जिस ने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 7अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटुम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार।

✦ सीख

रोमियों 16 की शुरुआत दिखाती है कि सुसमाचार की सेवकाई केवल एक व्यक्ति का काम नहीं थी। पौलुस अनेक सहकर्मियों, सेवकों और विश्वासियों का सम्मानपूर्वक स्मरण करता है।

2

कलीसिया के अनेक सेवकों को प्रेमपूर्वक नमस्कार

पद 8–16

8अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार। 9उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार। 10अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार। 11मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्कार।

12त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्कार। प्रिया परसिस को जिस ने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 13रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्कार। 14असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मास ओर पत्रुबास और हर्मेस और उन के साथ के भाइयों को नमस्कार। 15फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार॥ 16आपस में पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो तुम को मसीह की सारी कलीसियाओं की ओर से नमस्कार।

✝️ मसीह की कलीसिया — पद 16

कलीसिया में विश्वासियों के बीच प्रेम, आदर और आत्मीयता केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं, बल्कि मसीह में एकता का प्रमाण है।

3

फूट डालने वालों से सावधान रहो

पद 17–20

17अब हे भाइयो, मैं तुम से बिनती करता हूं, कि जो लोग उस शिक्षा के विपरीत जो तुम ने पाई है, फूट पड़ने, और ठोकर खाने के कारण होते हैं, उन्हें ताड़ लिया करो; और उन से दूर रहो। 18क्योंकि ऐसे लोग हमारे प्रभु मसीह की नहीं, परन्तु अपने पेट की सेवा करते हैं; और चिकनी चुपड़ी बातों से सीधे सादे मन के लोगों को बहका देते हैं। 19तुम्हारे आज्ञा मानने की चर्चा सब लोगों में फैल गई है; इसलिये मैं तुम्हारे विषय में आनन्द करता हूं; परन्तु मैं यह चाहता हूं, कि तुम भलाई के लिये बुद्धिमान, परन्तु बुराई के लिये भोले बने रहो। 20शान्ति का परमेश्वर शैतान को तुम्हारे पांवों से शीघ्र कुचलवा देगा॥ हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे।

✦ आत्मिक सावधानी

विश्वास में परिपक्वता का अर्थ केवल भलाई को पहचानना नहीं, बल्कि गलत शिक्षा, फूट और छल से भी सावधान रहना है। पौलुस भलाई में बुद्धिमान और बुराई के विषय में भोले बने रहने की शिक्षा देता है।

4

पौलुस के सहकर्मियों की ओर से नमस्कार

पद 21–24

21तीमुथियुस मेरे सहकर्मी का, और लूकियुस और यासोन और सोसिपत्रुस मेरे कुटुम्बियों का, तुम को नमस्कार। 22मुझ पत्री के लिखने वाले तिरितयुस का प्रभु में तुम को नमस्कार। 23गयुस का जो मेरी और कलीसिया का पहुनाई करने वाला है उसका तुम्हें नमस्कार: 24इरास्तुस जो नगर का भण्डारी है, और भाई क्वारतुस का, तुम को नमस्कार॥

5

सुसमाचार का भेद और परमेश्वर की महिमा

पद 25–27

25अब जो तुम को मेरे सुसमाचार अर्थात यीशु मसीह के विषय के प्रचार के अनुसार स्थिर कर सकता है, उस भेद के प्रकाश के अनुसार जो सनातन से छिपा रहा। 26परन्तु अब प्रगट होकर सनातन परमेश्वर की आज्ञा से भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकों के द्वारा सब जातियों को बताया गया है, कि वे विश्वास से आज्ञा मानने वाले हो जाएं। 27उसी अद्वैत बुद्धिमान परमेश्वर की यीशु मसीह के द्वारा युगानुयुग महिमा होती रहे। आमीन॥

✝️ अंतिम महिमा — पद 27

रोमियों का यह अध्याय और पूरा पत्र अन्ततः मनुष्य की नहीं, बल्कि यीशु मसीह के द्वारा अद्वैत बुद्धिमान परमेश्वर की युगानुयुग महिमा की ओर ले जाता है।

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