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मत्ती अध्याय 24 — बाइबल पाठ, व्याख्या और मुख्य शिक्षाएँ

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1

मन्दिर के विनाश और अन्त के चिन्ह

पद 1–14

1जब यीशु मन्दिर से निकलकर जा रहा था, तो उसके चेले उस को मन्दिर की रचना दिखाने के लिये उस के पास आए। 2उस ने उन से कहा, क्या तुम यह सब नहीं देखते? मैं तुम से सच कहता हूं, यहां पत्थर पर पत्थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा। 3और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, हम से कह कि ये बातें कब होंगी और तेरे आने का, और जगत के अन्त का क्या चिन्ह होगा? 4यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। 5क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे। 6तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्त न होगा। 7क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भूकम्प होंगे। 8ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी।

9तब वे क्लेश दिलाने के लिये तुम्हें पकड़वाएंगे, और तुम्हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे। 10तब बहुतेरे ठोकर खाएंगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे। 11और बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएंगे। 12और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा हो जाएगा। 13परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। 14और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा॥

🔥 विशेष वचन — पद 13

परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।

गहराई से समझें

यीशु पहले ही चेतावनी देता है कि युद्ध, अकाल, भूकम्प, सताव और झूठे भविष्यद्वक्ताओं का उठना अन्त का तत्काल प्रमाण नहीं है। इस पूरे भाग में मुख्य जोर सावधान रहने, भरमाए न जाने और अन्त तक धीरज धरने पर है।

2

भारी क्लेश और झूठे मसीहों की चेतावनी

पद 15–28

15सो जब तुम उस उजाड़ने वाली घृणित वस्तु को जिस की चर्चा दानिय्येल भविष्यद्वक्ता के द्वारा हुई थी, पवित्र स्थान में खड़ी हुई देखो, (जो पढ़े, वह समझे)। 16तब जो यहूदिया में हों वे पहाड़ों पर भाग जाएं। 17जो कोठे पर हों, वह अपने घर में से सामान लेने को न उतरे। 18और जो खेत में हों, वह अपना कपड़ा लेने को पीछे न लौटे। 19उन दिनों में जो गर्भवती और दूध पिलाती होंगी, उन के लिये हाय, हाय। 20और प्रार्थना किया करो; कि तुम्हें जाड़े में या सब्त के दिन भागना न पड़े। 21क्योंकि उस समय ऐसा भारी क्लेश होगा, जैसा जगत के आरम्भ से न अब तक हुआ, और न कभी होगा। 22और यदि वे दिन घटाए न जाते, तो कोई प्राणी न बचता; परन्तु चुने हुओं के कारण वे दिन घटाए जाएंगे।

23उस समय यदि कोई तुम से कहे, कि देखो, मसीह यहां हैं! या वहां है तो प्रतीति न करना। 24क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिन्ह और अद्भुत काम दिखाएंगे, कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें। 25देखो, मैं ने पहिले से तुम से यह सब कुछ कह दिया है। 26इसलिये यदि वे तुम से कहें, देखो, वह जंगल में है, तो बाहर न निकल जाना; देखो, वह कोठरियों में हैं, तो प्रतीति न करना। 27क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती जाती है, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा। 28जहां लोथ हो, वहीं गिद्ध इकट्ठे होंगे॥

⚠️ विशेष चेतावनी — पद 24

क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिन्ह और अद्भुत काम दिखाएंगे, कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें।

जानने योग्य

यीशु अपने चेलों को केवल चिन्ह देखने के लिये नहीं, बल्कि धोखे से बचने के लिये तैयार करता है। बड़े चिन्ह और अद्भुत काम अपने आप में सत्य की गारंटी नहीं हैं; इसलिए उसकी चेतावनी है—“प्रतीति न करना।”

3

मनुष्य के पुत्र का आगमन और आकाशीय चिन्ह

पद 29–31

29उन दिनों के क्लेश के बाद तुरन्त सूर्य अन्धियारा हो जाएगा, और चान्द का प्रकाश जाता रहेगा, और तारे आकाश से गिर पड़ेंगे और आकाश की शक्तियां हिलाई जाएंगी। 30तब मनुष्य के पुत्र का चिन्ह आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ और ऐश्वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे। 31और वह तुरही के बड़े शब्द के साथ, अपने दूतों को भेजेगा, और वे आकाश के इस छोर से उस छोर तक, चारों दिशा से उसके चुने हुओं को इकट्ठे करेंगे।

👑 विशेष वचन — पद 30

मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ और ऐश्वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे।

गहराई से समझें

झूठे दावों के विपरीत, मनुष्य के पुत्र का आगमन छिपा हुआ या सीमित घटना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। यहाँ उसका आगमन सामर्थ और ऐश्वर्य के साथ तथा चुने हुओं को इकट्ठा करने के रूप में बताया गया है।

4

अंजीर के पेड़ से सीख और परमेश्वर के वचन की स्थिरता

पद 32–35

32अंजीर के पेड़ से यह दृष्टान्त सीखो: जब उस की डाली कोमल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो, कि ग्रीष्म काल निकट है। 33इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो, कि वह निकट है, वरन द्वार ही पर है। 34मैं तुम से सच कहता हूं, कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो लें, तब तक यह पीढ़ी जाती न रहेगी। 35आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।

📖 विशेष वचन — पद 35

आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।

आज के लिये सीख

परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन यीशु अपने वचन की स्थिरता पर जोर देता है। अंजीर के पेड़ की तरह चिन्हों को समझने की बात के साथ यह घोषणा भी आती है कि उसकी बातें कभी नहीं टलेंगी।

5

उस दिन और उस घड़ी को कोई नहीं जानता

पद 36–41

36उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता। 37जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 38क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी। 39और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 40उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। 41दो स्त्रियां चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी।

⏳ विशेष वचन — पद 36

उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता।

गहराई से समझें

नूह के दिनों का उदाहरण इस बात पर जोर देता है कि सामान्य जीवन चलता रहेगा और लोग उस घड़ी की गंभीरता को नहीं समझेंगे। इसलिए यीशु का जोर तारीख निकालने पर नहीं, बल्कि तैयार रहने पर है।

6

जागते रहो और तैयार रहो

पद 42–51

42इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा। 43परन्तु यह जान लो कि यदि घर का स्वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता। 44इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा। 45सो वह विश्वासयोग्य और बुद्धिमान दास कौन है, जिसे स्वामी ने अपने नौकर चाकरों पर सरदार ठहराया, कि समय पर उन्हें भोजन दे? 46धन्य है, वह दास, जिसे उसका स्वामी आकर ऐसा ही करते पाए। 47मैं तुम से सच कहता हूं; वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर सरदार ठहराएगा।

48परन्तु यदि वह दुष्ट दास सोचने लगे, कि मेरे स्वामी के आने में देर है। 49और अपने साथी दासों को पीटने लगे, और पियक्कड़ों के साथ खाए पीए। 50तो उस दास का स्वामी ऐसे दिन आएगा, जब वह उस की बाट न जोहता हो। 51और ऐसी घड़ी कि वह न जानता हो, और उसे भारी ताड़ना देकर, उसका भाग कपटियों के साथ ठहराएगा: वहां रोना और दांत पीसना होगा॥

⏰ विशेष वचन — पद 44

इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।

आज के लिये सीख

अध्याय का अन्त भविष्य की तारीख जानने की कोशिश के बजाय वर्तमान जीवन की जिम्मेदारी पर ध्यान केन्द्रित करता है। विश्वासयोग्य दास वह है जो स्वामी की अनुपस्थिति में भी अपनी जिम्मेदारी faithfully निभाता रहता है।

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