यीशु का पुनरुत्थान और खाली कब्र
पद 1–81जब सब्त का दिन बीत गया, तो मरियम मगदलीनी और याकूब की माता मरियम और शलोमी ने सुगन्धित वस्तुएं मोल लीं, कि आकर उस पर मलें। 2और सप्ताह के पहिले दिन बड़ी भोर, जब सूरज निकला ही था, वे कब्र पर आईं। 3और आपस में कहती थीं, कि हमारे लिये कब्र के द्वार पर से पत्थर कौन लुढ़ाएगा? 4जब उन्होंने आंख उठाई, तो देखा कि पत्थर लुढ़का हुआ है! क्योंकि वह बहुत ही बड़ा था।
5और कब्र के भीतर जाकर, उन्होंने एक जवान को श्वेत वस्त्र पहिने हुए दाहिनी ओर बैठे देखा, और बहुत चकित हुईं। 6उस ने उन से कहा, चकित मत हो, तुम यीशु नासरी को, जो क्रूस पर चढ़ाया गया था, ढूंढ़ती हो: वह जी उठा है; यहां नहीं है; देखो, यही वह स्थान है, जहां उन्होंने उसे रखा था।
6उस ने उन से कहा, चकित मत हो, तुम यीशु नासरी को, जो क्रूस पर चढ़ाया गया था, ढूंढ़ती हो: वह जी उठा है; यहां नहीं है; देखो, यही वह स्थान है, जहां उन्होंने उसे रखा था।
7परन्तु तुम जाओ, और उसके चेलों और पतरस से कहो, कि वह तुम से पहिले गलील को जाएगा; जैसा उस ने तुम से कहा था, तुम वहीं उसे देखोगे। 8और वे निकलकर कब्र से भाग गईं; क्योंकि कपकपी और घबराहट उन पर छा गई थीं और उन्होंने किसी से कुछ न कहा, क्योंकि डरती थीं॥
खाली कब्र केवल यह नहीं बताती कि यीशु की देह वहां नहीं थी; स्वर्गदूत स्पष्ट घोषणा करता है कि वह जी उठा है। पुनरुत्थान मरकुस के सुसमाचार की निर्णायक घटना है।
मरियम मगदलीनी और अन्य शिष्यों को पुनरुत्थित यीशु का समाचार
पद 9–149सप्ताह के पहिले दिन भोर होते ही वह जी उठ कर पहिले पहिल मरियम मगदलीनी को जिस में से उस ने सात दुष्टात्माएं निकाली थीं, दिखाई दिया। 10उस ने जाकर उसके साथियों को जो शोक में डूबे हुए थे और रो रहे थे, समाचार दिया। 11और उन्होंने यह सुनकर कि वह जीवित है, और उस ने उसे देखा है प्रतीति न की॥
12इस के बाद वह दूसरे रूप में उन में से दो को जब वे गांव की ओर जा रहे थे, दिखाई दिया। 13उन्होंने भी जाकर औरों को समाचार दिया, परन्तु उन्होंने उन की भी प्रतीति न की॥ 14पीछे वह उन ग्यारहों को भी, जब वे भोजन करने बैठे थे दिखाई दिया, और उन के अविश्वास और मन की कठोरता पर उलाहना दिया, क्योंकि जिन्हों ने उसके जी उठने के बाद उसे देखा था, इन्होंने उन की प्रतीति न की थी।
14पीछे वह उन ग्यारहों को भी, जब वे भोजन करने बैठे थे दिखाई दिया, और उन के अविश्वास और मन की कठोरता पर उलाहना दिया।
पुनरुत्थान का समाचार सुनने के बाद भी शिष्यों ने तुरन्त विश्वास नहीं किया। मरकुस यहां उनके अविश्वास को स्पष्ट रूप से दर्ज करता है, जिससे आगे दिए गए यीशु के आदेश और गवाही का महत्व और भी स्पष्ट होता है।
महान आदेश और सुसमाचार प्रचार
पद 15–1815और उस ने उन से कहा, तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।
15और उस ने उन से कहा, तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।
16जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा। 17और विश्वास करने वालों में ये चिन्ह होंगे कि वे मेरे नाम से दुष्टात्माओं को निकालेंगे। 18नई भाषा बोलेंगे, सांपों को उठा लेंगे, और यदि वे नाशक वस्तु भी पी जाएं तौभी उन की कुछ हानि न होगी, वे बीमारों पर हाथ रखेंगे, और वे चंगे हो जाएंगे।
यीशु का आदेश केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं था। शिष्यों को “सारे जगत” और “सारी सृष्टि” के लोगों तक सुसमाचार पहुंचाने के लिये भेजा गया।
यीशु का स्वर्गारोहण और शिष्यों की सेवकाई
पद 19–2019निदान प्रभु यीशु उन से बातें करने के बाद स्वर्ग पर उठा लिया गया, और परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गया।
19निदान प्रभु यीशु उन से बातें करने के बाद स्वर्ग पर उठा लिया गया, और परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गया।
20और उन्होंने निकलकर हर जगह प्रचार किया, और प्रभु उन के साथ काम करता रहा, और उन चिन्हों के द्वारा जो साथ साथ होते थे वचन को, दृढ़ करता रहा। आमीन॥
अध्याय का अन्त केवल स्वर्गारोहण पर नहीं होता। यीशु के स्वर्ग पर उठाए जाने के बाद भी शिष्य प्रचार करते रहे और प्रभु उनके साथ काम करता रहा। इस प्रकार यीशु की पृथ्वी की सेवकाई के बाद सुसमाचार की घोषणा शिष्यों की सेवकाई के माध्यम से आगे बढ़ती है।
परमेश्वर के वचन को और लोगों तक पहुँचाएँ
यदि इस सेवकाई के द्वारा आपको परमेश्वर के वचन से आशीष मिली है, तो आपका सहयोग इस संदेश को और लोगों तक पहुँचाने में सहायता कर सकता है।
सेवकाई में सहयोग करें

किसी भी UPI ऐप से QR स्कैन करके सहयोग करें।
0 टिप्पणियाँ