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मत्ती अध्याय 3 — बाइबल पाठ, व्याख्या और मुख्य शिक्षाएँ

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1

यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले का प्रचार और मन फिराव

पद 1–6

1उन दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा। कि 2मन फिराओ; क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। 3यह वही है जिस की चर्चा यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा की गई कि जंगल में एक पुकारने वाले का शब्द हो रहा है, कि प्रभु का मार्ग तैयार करो, उस की सड़कें सीधी करो।

✦ महत्वपूर्ण वचन — पद 2

मन फिराओ; क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।

4यह यूहन्ना ऊंट के रोम का वस्त्र पहिने था, और अपनी कमर में चमड़े का पटुका बान्धे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियां और बनमधु था। 5तब यरूशलेम के और सारे यहूदिया के, और यरदन के आस पास के सारे देश के लोग उसके पास निकल आए। 6और अपने अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उस से बपतिस्मा लिया।

💡 जानने योग्य

यूहन्ना का संदेश बहुत सीधा था—मन फिराना, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया था। उसके पास आने वाले लोगों ने अपने पापों को माना और यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लिया।

2

फरीसियों और सदूकियों को मन फिराव का फल लाने की चेतावनी

पद 7–10

7जब उस ने बहुतेरे फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा के लिये अपने पास आते देखा, तो उन से कहा, कि हे सांप के बच्चों तुम्हें किस ने जता दिया, कि आने वाले क्रोध से भागो? 8सो मन फिराव के योग्य फल लाओ।

✦ महत्वपूर्ण वचन — पद 8

सो मन फिराव के योग्य फल लाओ।

9और अपने अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता इब्राहीम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर इन पत्थरों से इब्राहीम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है। 10और अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।

🔎 गहराई से समझें

इस अंश में केवल धार्मिक पहचान या वंश पर भरोसा करने के बजाय जीवन में मन फिराव का फल दिखाई देने पर जोर दिया गया है। यूहन्ना का संदेश बाहरी पहचान से अधिक वास्तविक परिवर्तन की ओर ध्यान दिलाता है।

3

आनेवाला मसीह और पवित्र आत्मा का बपतिस्मा

पद 11–12
✦ महत्वपूर्ण वचन — पद 11

मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आनेवाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।

11मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आनेवाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। 12उसका सूप उस के हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्छी रीति से साफ करेगा, और अपने गेहूं को तो खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो बुझने की नहीं॥

✨ ध्यान देने योग्य

यूहन्ना स्वयं अपनी भूमिका को मसीह से अलग करके स्पष्ट करता है। वह अपने बाद आनेवाले को अपने से शक्तिशाली बताता है और उसके द्वारा पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा दिए जाने की बात करता है।

4

यीशु का बपतिस्मा और धार्मिकता को पूरा करना

पद 13–15

13उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे पर यूहन्ना के पास उस से बपतिस्मा लेने आया। 14परन्तु यूहन्ना यह कहकर उसे रोकने लगा, कि मुझे तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यक्ता है, और तू मेरे पास आया है?

✦ महत्वपूर्ण वचन — पद 15

यीशु ने उस को यह उत्तर दिया, कि अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है, तब उस ने उस की बात मान ली।

15यीशु ने उस को यह उत्तर दिया, कि अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है, तब उस ने उस की बात मान ली।

📖 गहराई से समझें

यीशु के बपतिस्मे के प्रसंग में यूहन्ना की झिझक और यीशु का उत्तर दोनों महत्वपूर्ण हैं। यीशु स्वयं इसे “सब धार्मिकता को पूरा” करने के संदर्भ में प्रस्तुत करता है।

5

आकाश खुलना और परमेश्वर की आकाशवाणी

पद 16–17

16और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया; और उस ने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर की नाईं उतरते और अपने ऊपर आते देखा।

✦ परमेश्वर की आकाशवाणी — पद 17

और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं॥

17और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं॥

✨ अध्याय का महत्वपूर्ण क्षण

अध्याय का समापन यीशु के बपतिस्मे के बाद आकाश खुलने, परमेश्वर के आत्मा के उतरने और आकाशवाणी होने के दृश्य से होता है। इस प्रकार अध्याय यूहन्ना के मन फिराव के संदेश से शुरू होकर यीशु के विषय में परमेश्वर की सार्वजनिक घोषणा पर समाप्त होता है।

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