पूर्व से ज्योतिषियों का यीशु को खोजते हुए आना
पद 1–61हेरोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व से कई ज्योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे। 2कि यहूदियों का राजा जिस का जन्म हुआ है, कहां है? क्योंकि हम ने पूर्व में उसका तारा देखा है और उस को प्रणाम करने आए हैं। 3यह सुनकर हेरोदेस राजा और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया।
4और उस ने लोगों के सब महायाजकों और शास्त्रियों को इकट्ठे करके उन से पूछा, कि मसीह का जन्म कहाँ होना चाहिए? 5उन्होंने उस से कहा, यहूदिया के बैतलहम में; क्योंकि भविष्यद्वक्ता के द्वारा यों लिखा है। 6कि हे बैतलहम, जो यहूदा के देश में है, तू किसी रीति से यहूदा के अधिकारियों में सब से छोटा नहीं; क्योंकि तुझ में से एक अधिपति निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा।
क्योंकि तुझ में से एक अधिपति निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा।
इस अंश में बैतलहम को यीशु के जन्मस्थान के रूप में स्पष्ट किया गया है और उसके विषय में यह कहा गया है कि वह इस्राएल की रखवाली करने वाला अधिपति होगा।
ज्योतिषियों का यीशु को प्रणाम करना और भेंट चढ़ाना
पद 7–127तब हेरोदेस ने ज्योतिषियों को चुपके से बुलाकर उन से पूछा, कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था। 8और उस ने यह कहकर उन्हें बैतलहम भेजा, कि जाकर उस बालक के विषय में ठीक ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि मैं भी आकर उस को प्रणाम करूं। 9वे राजा की बात सुनकर चले गए, और देखो, जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उन के आगे आगे चला, और जंहा बालक था, उस जगह के ऊपर पंहुचकर ठहर गया॥
10उस तारे को देखकर वे अति आनन्दित हुए। 11और उस घर में पहुंचकर उस बालक को उस की माता मरियम के साथ देखा, और मुंह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया; और अपना अपना यैला खोलकर उसे सोना, और लोहबान, और गन्धरस की भेंट चढ़ाई। 12और स्वप्न में यह चितौनी पाकर कि हेरोदेस के पास फिर न जाना, वे दूसरे मार्ग से होकर अपने देश को चले गए॥
और मुंह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया; और अपना अपना यैला खोलकर उसे सोना, और लोहबान, और गन्धरस की भेंट चढ़ाई।
ज्योतिषियों की यात्रा केवल यीशु को खोजने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने उसे देखकर प्रणाम किया और अपनी भेंटें चढ़ाईं। पद 12 यह भी दिखाता है कि उन्हें स्वप्न में चेतावनी मिलने के बाद उन्होंने हेरोदेस के पास वापस न जाकर दूसरे मार्ग से अपने देश लौटना चुना।
मिस्र को भागना और भविष्यद्वाणी का पूरा होना
पद 13–15उठ; उस बालक को और उस की माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूं, तब तक वहीं रहना।
13उन के चले जाने के बाद देखो, प्रभु के एक दूत ने स्वप्न में यूसुफ को दिखाई देकर कहा, उठ; उस बालक को और उस की माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूं, तब तक वहीं रहना; क्योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूंढ़ने पर है कि उसे मरवा डाले। 14वह रात ही को उठकर बालक और उस की माता को लेकर मिस्र को चल दिया।
15और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा; इसलिये कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था कि मैं ने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया पूरा हो।
इस भाग में यूसुफ की आज्ञाकारिता स्पष्ट दिखाई देती है। उसे चेतावनी मिलते ही वह रात में उठकर बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र चला गया। पद 15 इस घटना को भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहे गए वचन के पूरा होने से जोड़ता है।
हेरोदेस का क्रोध और बैतलहम के बालकों की हत्या
पद 16–1816जब हेरोदेस ने यह देखा, कि ज्योतिषियों ने मेरे साथ ठट्ठा किया है, तब वह क्रोध से भर गया; और लोगों को भेजकर ज्योतिषियों से ठीक ठीक पूछे हुए समय के अनुसार बैतलहम और उसके आस पास के सब लड़कों को जो दो वर्ष के, वा उस से छोटे थे, मरवा डाला।
कि रामाह में एक करूण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी, और शान्त होना न चाहती थी, क्योंकि वे हैं नहीं॥
17तब जो वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हुआ, 18कि रामाह में एक करूण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी, और शान्त होना न चाहती थी, क्योंकि वे हैं नहीं॥
अध्याय का यह भाग यीशु के जन्म के साथ जुड़ी विरोध और पीड़ा को सामने लाता है। मत्ती इस घटना को यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहे गए वचन के पूरा होने से जोड़ता है।
मिस्र से लौटना और नासरत में बसना
पद 19–2319हेरोदेस के मरने के बाद देखो, प्रभु के दूत ने मिस्र में यूसुफ को स्वप्न में दिखाई देकर कहा। 20कि उठ, बालक और उस की माता को लेकर इस्राएल के देश में चला जा; क्योंकिं जो बालक के प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए। 21वह उठा, और बालक और उस की माता को साथ लेकर इस्राएल के देश में आया।
22परन्तु यह सुनकर कि अरिखलाउस अपने पिता हेरोदेस की जगह यहूदिया पर राज्य कर रहा है, वहां जाने से डरा; और स्वप्न में चितौनी पाकर गलील देश में चला गया। 23और नासरत नाम नगर में जा बसा; ताकि वह वचन पूरा हो, जो भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा गया था, कि वह नासरी कहलाएगा॥
और नासरत नाम नगर में जा बसा; ताकि वह वचन पूरा हो, जो भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा गया था, कि वह नासरी कहलाएगा॥
पूरे अध्याय में यूसुफ को बार-बार परमेश्वर की ओर से दिशा मिलती है और वह उसके अनुसार कदम उठाता है। अध्याय का अन्त भी इस बात पर होता है कि घटनाएं परमेश्वर के वचन की पूर्ति की ओर बढ़ रही थीं।
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