यीशु का रूपान्तर और स्वर्गीय महिमा
पद 1–81छ: दिन के बाद यीशु ने पतरस और याकूब और उसके भाई यूहन्ना को साथ लिया, और उन्हें एकान्त में किसी ऊंचे पहाड़ पर ले गया। 2और उनके साम्हने उसका रूपान्तर हुआ और उसका मुंह सूर्य की नाईं चमका और उसका वस्त्र ज्योति की नाईं उजला हो गया। 3और देखो, मूसा और एलिय्याह उसके साथ बातें करते हुए उन्हें दिखाई दिए।
और उनके साम्हने उसका रूपान्तर हुआ और उसका मुंह सूर्य की नाईं चमका और उसका वस्त्र ज्योति की नाईं उजला हो गया।
4इस पर पतरस ने यीशु से कहा, हे प्रभु, हमारा यहां रहना अच्छा है; इच्छा हो तो यहां तीन मण्डप बनाऊं; एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्याह के लिये। 5वह बोल ही रहा था, कि देखो, एक उजले बादल ने उन्हें छा लिया, और देखो; उस बादल में से यह शब्द निकला, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं प्रसन्न हूं: इस की सुनो। 6चेले यह सुनकर मुंह के बल गिर गए और अत्यन्त डर गए। 7यीशु ने पास आकर उन्हें छूआ, और कहा, उठो; डरो मत। 8तब उन्होंने अपनी आंखे उठाकर यीशु को छोड़ और किसी को न देखा।
रूपान्तर के समय शिष्यों ने यीशु की महिमा की एक असाधारण झलक देखी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि बादल में से पिता की आवाज ने शिष्यों को यीशु की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा—“इस की सुनो।” यह घटना यीशु की पहचान और उसके अधिकार को स्पष्ट रूप से सामने रखती है।
एलिय्याह के आने की भविष्यद्वाणी और यूहन्ना
पद 9–139जब वे पहाड़ से उतर रहे थे तब यीशु ने उन्हें यह आज्ञा दी; कि जब तक मनुष्य का पुत्र मरे हुओं में से न जी उठे तब तक जो कुछ तुम ने देखा है किसी से न कहना। 10और उसके चेलों ने उस से पूछा, फिर शास्त्री क्यों कहते हैं, कि एलिय्याह का पहले आना अवश्य है? 11उस ने उत्तर दिया, कि एलिय्याह तो आएगा: और सब कुछ सुधारेगा। 12परन्तु मैं तुम से कहता हूं, कि एलिय्याह आ चुका; और उन्होंने उसे नहीं पहचाना; परन्तु जैसा चाहा वैसा ही उसके साथ किया: इसी रीति से मनुष्य का पुत्र भी उन के हाथ से दुख उठाएगा। 13तब चेलों ने समझा कि उस ने हम से यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के विषय में कहा है।
परन्तु मैं तुम से कहता हूं, कि एलिय्याह आ चुका; और उन्होंने उसे नहीं पहचाना।
शिष्यों को समझ में आया कि यीशु एलिय्याह की भविष्यद्वाणी के विषय में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की ओर संकेत कर रहा था। इस प्रकार यीशु ने अपने आने और यूहन्ना की सेवकाई के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट किया।
विश्वास की कमी और दुष्टात्मा से ग्रस्त बालक की चंगाई
पद 14–2114जब वे भीड़ के पास पहुंचे, तो एक मनुष्य उसके पास आया, और घुटने टेक कर कहने लगा। 15हे प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर; क्योंकि उस को मिर्गी आती है: और वह बहुत दुख उठाता है; और बार बार आग में और बार बार पानी में गिर पड़ता है। 16और मैं उस को तेरे चेलों के पास लाया था, पर वे उसे अच्छा नहीं कर सके। 17यीशु ने उत्तर दिया, कि हे अविश्वासी और हठीले लोगों मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा? कब तक तुम्हारी सहूंगा? उसे यहां मेरे पास लाओ। 18तब यीशु ने उसे घुड़का, और दुष्टात्मा उस में से निकला; और लड़का उसी घड़ी अच्छा हो गया। 19तब चेलों ने एकान्त में यीशु के पास आकर कहा; हम इसे क्यों नहीं निकाल सके?
उस ने उन से कहा, अपने विश्वास की घटी के कारण: क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, कि यहां से सरककर वहां चला जा, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये अन्होनी न होगी।
20उस ने उन से कहा, अपने विश्वास की घटी के कारण: क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, कि यहां से सरककर वहां चला जा, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये अन्होनी न होगी। 21जब वे गलील में थे, तो यीशु ने उन से कहा; मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा।
यीशु ने शिष्यों को विश्वास की सामर्थ्य के विषय में सिखाया। यहां जोर विश्वास के आकार पर नहीं, बल्कि परमेश्वर पर भरोसे की वास्तविकता पर है। “राई के दाने” का उदाहरण छोटे दिखाई देने वाले विश्वास के माध्यम से बड़ी बात की ओर संकेत करता है।
यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान की दूसरी भविष्यवाणी
पद 22–2322और वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा। 23इस पर वे बहुत उदास हुए॥
और वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा।
मन्दिर के कर के विषय में शिक्षा
पद 24–2724जब वे कफरनहूम में पहुंचे, तो मन्दिर के लिये कर लेने वालों ने पतरस के पास आकर पूछा, कि क्या तुम्हारा गुरू मन्दिर का कर नहीं देता? उस ने कहा, हां देता तो है। 25जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहिले उस से कहा, हे शमौन तू क्या समझता है पृथ्वी के राजा महसूल या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से? पतरस ने उन से कहा, परायों से। 26यीशु ने उस से कहा, तो पुत्र बच गए।
यीशु ने पहले यह स्पष्ट किया कि राजा अपने पुत्रों से कर नहीं लेते। इसके द्वारा उसने अपने सम्बन्ध और अधिकार की ओर संकेत किया। फिर भी उसने किसी को ठोकर न खिलाने के लिये कर देने का मार्ग चुना।
27तौभी इसलिये कि हम उन्हें ठोकर न खिलाएं, तू झील के किनारे जाकर बंसी डाल, और जो मछली पहिले निकले, उसे ले; तो तुझे उसका मुंह खोलने पर एक सिक्का मिलेगा, उसी को लेकर मेरे और अपने बदले उन्हें दे देना॥
तौभी इसलिये कि हम उन्हें ठोकर न खिलाएं…
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