परमेश्वर की प्रतिज्ञा और अब्राम का विश्वास
पद 1–61इन बातों के पश्चात यहोवा को यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुंचा, कि हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा फल मैं हूं। 2अब्राम ने कहा, हे प्रभु यहोवा मैं तो निर्वंश हूं, और मेरे घर का वारिस यह दमिश्की एलीएजेर होगा, सो तू मुझे क्या देगा? 3और अब्राम ने कहा, मुझे तो तू ने वंश नहीं दिया, और क्या देखता हूं, कि मेरे घर में उत्पन्न हुआ एक जन मेरा वारिस होगा। 4तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि यह तेरा वारिस न होगा, तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा।
5और उसने उसको बाहर ले जाके कहा, आकाश की ओर दृष्टि करके तारागण को गिन, क्या तू उन को गिन सकता है? फिर उसने उससे कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा। 6उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।
अब्राम अपनी वर्तमान परिस्थिति को देखकर प्रश्न करता है, लेकिन परमेश्वर उसे अपनी प्रतिज्ञा की ओर फिर से देखाता है। अब्राम का विश्वास उसकी परिस्थिति से नहीं, परमेश्वर के वचन से जुड़ता है।
देश के अधिकार की प्रतिज्ञा और वाचा की तैयारी
पद 7–117और उसने उससे कहा मैं वही यहोवा हूं जो तुझे कस्दियों के ऊर नगर से बाहर ले आया, कि तुझ को इस देश का अधिकार दूं। 8उसने कहा, हे प्रभु यहोवा मैं कैसे जानूं कि मैं इसका अधिकारी हूंगा? 9यहोवा ने उससे कहा, मेरे लिये तीन वर्ष की एक कलोर, और तीन वर्ष की एक बकरी, और तीन वर्ष का एक मेंढ़ा, और एक पिण्डुक और कबूतर का एक बच्चा ले।
10और इन सभों को ले कर, उसने बीच में से दो टुकड़े कर दिया, और टुकड़ों को आम्हने-साम्हने रखा: पर चिडिय़ाओं को उसने टुकड़े न किया। 11और जब मांसाहारी पक्षी लोथों पर झपटे, तब अब्राम ने उन्हें उड़ा दिया।
अब्राम को केवल प्रतिज्ञा ही नहीं दी जाती, बल्कि वाचा के एक विशेष प्रसंग के लिये तैयार किया जाता है। वह प्रतीक्षा करते हुए उस प्रक्रिया में बना रहता है।
अब्राम के वंश के भविष्य की घोषणा
पद 12–1612जब सूर्य अस्त होने लगा, तब अब्राम को भारी नींद आई; और देखो, अत्यन्त भय और अन्धकार ने उसे छा लिया। 13तब यहोवा ने अब्राम से कहा, यह निश्चय जान कि तेरे वंश पराए देश में परदेशी हो कर रहेंगे, और उसके देश के लोगों के दास हो जाएंगे; और वे उन को चार सौ वर्ष लों दु:ख देंगे; 14फिर जिस देश के वे दास होंगे उसको मैं दण्ड दूंगा: और उसके पश्चात वे बड़ा धन वहां से ले कर निकल आएंगे।
15तू तो अपने पितरों में कुशल के साथ मिल जाएगा; तुझे पूरे बुढ़ापे में मिट्टी दी जाएगी। 16पर वे चौथी पीढ़ी में यहां फिर आएंगे: क्योंकि अब तक एमोरियों का अधर्म पूरा नहीं हुआ।
परमेश्वर अब्राम को केवल तत्काल आने वाली बात नहीं बताता, बल्कि उसके वंश से जुड़ा एक लम्बा भविष्य भी प्रकट करता है। प्रतिज्ञा की पूर्ति परमेश्वर के निर्धारित समय के अनुसार होगी।
यहोवा की वाचा की पुष्टि
पद 17–1817और ऐसा हुआ कि जब सूर्य अस्त हो गया और घोर अन्धकार छा गया, तब एक अंगेठी जिस में से धुआं उठता था और एक जलता हुआ पलीता देख पड़ा जो उन टुकड़ों के बीच में से हो कर निकल गया।
18उसी दिन यहोवा ने अब्राम के साथ यह वाचा बान्धी, कि मिस्र के महानद से ले कर परात नाम बड़े नद तक जितना देश है,
इस प्रसंग में परमेश्वर की प्रतिज्ञा वाचा के रूप में स्थापित होती है। अब्राम के लिये यह उसके भविष्य और उसके वंश से जुड़ी परमेश्वर की निश्चित प्रतिज्ञा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
प्रतिज्ञा किए गए देश की जातियां
पद 19–2119अर्थात, केनियों, कनिज्जियों, कद्क़ोनियों, 20हित्तियों, परीज्जियों, रपाइयों, 21एमोरियों, कनानियों, गिर्गाशियों और यबूसियों का देश मैं ने तेरे वंश को दिया है॥
अध्याय की शुरुआत अब्राम के डर और उसके प्रश्न से होती है, लेकिन अन्त परमेश्वर की वाचा और उसके वंश के लिये निश्चित प्रतिज्ञा के साथ होता है। विश्वास, वाचा और भविष्य की प्रतिज्ञा इस अध्याय के मुख्य विषय हैं।
परमेश्वर के वचन को और लोगों तक पहुँचाएँ
यदि इस सेवकाई के द्वारा आपको परमेश्वर के वचन से आशीष मिली है, तो आपका सहयोग इस संदेश को और लोगों तक पहुँचाने में सहायता कर सकता है।
सेवकाई में सहयोग करें

किसी भी UPI ऐप से QR स्कैन करके सहयोग करें।
0 टिप्पणियाँ