कैन और हाबिल की भेंट
पद 1–71जब आदम अपनी पत्नी हव्वा के पास गया तब उसने गर्भवती हो कर कैन को जन्म दिया और कहा, मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरुष पाया है। 2फिर वह उसके भाई हाबिल को भी जन्मा, और हाबिल तो भेड़-बकरियों का चरवाहा बन गया, परन्तु कैन भूमि की खेती करने वाला किसान बना। 3कुछ दिनों के पश्चात कैन यहोवा के पास भूमि की उपज में से कुछ भेंट ले आया। 4और हाबिल भी अपनी भेड़-बकरियों के कई एक पहिलौठे बच्चे भेंट चढ़ाने ले आया और उनकी चर्बी भेंट चढ़ाई; तब यहोवा ने हाबिल और उसकी भेंट को तो ग्रहण किया, 5परन्तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुंह पर उदासी छा गई। 6तब यहोवा ने कैन से कहा, तू क्यों क्रोधित हुआ? और तेरे मुंह पर उदासी क्यों छा गई है? 7यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है, और उसकी लालसा तेरी और होगी, और तू उस पर प्रभुता करेगा।
मनुष्य के भीतर उठने वाला क्रोध और पाप की ओर झुकाव आरम्भ में ही पहचाना और नियंत्रित किया जाना आवश्यक है।
कैन द्वारा हाबिल की हत्या
पद 8–108तब कैन ने अपने भाई हाबिल से कुछ कहा: और जब वे मैदान में थे, तब कैन ने अपने भाई हाबिल पर चढ़ कर उसे घात किया। 9तब यहोवा ने कैन से पूछा, तेरा भाई हाबिल कहां है? उसने कहा मालूम नहीं: क्या मैं अपने भाई का रखवाला हूं? 10उसने कहा, तू ने क्या किया है? तेरे भाई का लोहू भूमि में से मेरी ओर चिल्ला कर मेरी दोहाई दे रहा है!
पाप केवल व्यक्ति और परमेश्वर के सम्बन्ध को प्रभावित नहीं करता, बल्कि दूसरे मनुष्य के जीवन पर भी विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है। हाबिल का लोहू न्याय की पुकार के रूप में परमेश्वर के सामने आता है।
कैन पर दण्ड और परमेश्वर की रक्षा
पद 11–1611इसलिये अब भूमि जिसने तेरे भाई का लोहू तेरे हाथ से पीने के लिये अपना मुंह खोला है, उसकी ओर से तू शापित है। 12चाहे तू भूमि पर खेती करे, तौभी उसकी पूरी उपज फिर तुझे न मिलेगी, और तू पृथ्वी पर बहेतू और भगोड़ा होगा। 13तब कैन ने यहोवा से कहा, मेरा दण्ड सहने से बाहर है। 14देख, तू ने आज के दिन मुझे भूमि पर से निकाला है और मैं तेरी दृष्टि की आड़ मे रहूंगा और पृथ्वी पर बहेतू और भगोड़ा रहूंगा; और जो कोई मुझे पाएगा, मुझे घात करेगा। 15इस कारण यहोवा ने उससे कहा, जो कोई कैन को घात करेगा उससे सात गुणा पलटा लिया जाएगा। और यहोवा ने कैन के लिये एक चिन्ह ठहराया ऐसा न हो कि कोई उसे पाकर मार डाले॥ 16तब कैन यहोवा के सम्मुख से निकल गया, और नोद नाम देश में, जो अदन के पूर्व की ओर है, रहने लगा।
कैन को उसके कर्म का परिणाम भुगतना पड़ा, फिर भी परमेश्वर ने उसे प्रतिशोध के द्वारा मारे जाने से बचाने के लिये चिन्ह ठहराया।
कैन का वंश और मानवीय सभ्यता का विकास
पद 17–2217जब कैन अपनी पत्नी के पास गया जब वह गर्भवती हुई और हनोक को जन्मी, फिर कैन ने एक नगर बसाया और उस नगर का नाम अपने पुत्र के नाम पर हनोक रखा। 18और हनोक से ईराद उत्पन्न हुआ, और ईराद ने महूयाएल को जन्म दिया, और महूयाएल ने मतूशाएल को, और मतूशाएल ने लेमेक को जन्म दिया। 19और लेमेक ने दो स्त्रियां ब्याह ली: जिन में से एक का नाम आदा, और दूसरी को सिल्ला है। 20और आदा ने याबाल को जन्म दिया। वह तम्बुओं में रहना और जानवरों का पालन इन दोनों रीतियों का उत्पादक हुआ। 21और उसके भाई का नाम यूबाल है: वह वीणा और बांसुरी आदि बाजों के बजाने की सारी रीति का उत्पादक हुआ। 22और सिल्ला ने भी तूबल्कैन नाम एक पुत्र को जन्म दिया: वह पीतल और लोहे के सब धार वाले हथियारों का गढ़ने वाला हुआ: और तूबल्कैन की बहिन नामा थी।
कैन के वंश में नगर-निर्माण, पशुपालन, संगीत और धातु-कर्म जैसी विभिन्न मानवीय गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। यह विवरण उस वंश के बढ़ते सामाजिक और तकनीकी विकास को सामने रखता है।
लेमेक का घमण्ड और प्रतिशोध
पद 23–2423और लेमेक ने अपनी पत्नियों से कहा, हे आदा और हे सिल्ला मेरी सुनो; हे लेमेक की पत्नियों, मेरी बात पर कान लगाओ: मैंने एक पुरुष को जो मेरे चोट लगाता था, अर्थात एक जवान को जो मुझे घायल करता था, घात किया है। 24जब कैन का पलटा सात गुणा लिया जाएगा। तो लेमेक का सत्तर गुणा लिया जाएगा।
कैन के सात गुणा पलटे की बात को लेमेक अपने प्रतिशोध के दावे को और अधिक बढ़ाने के लिये प्रस्तुत करता है।
शेत का जन्म और यहोवा से प्रार्थना
पद 25–2625और आदम अपनी पत्नी के पास फिर गया; और उसने एक पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम यह कह के शेत रखा, कि परमेश्वर ने मेरे लिये हाबिल की सन्ती, जिस को कैन ने घात किया, एक और वंश ठहरा दिया है। 26और शेत के भी एक पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने उसका नाम एनोश रखा, उसी समय से लोग यहोवा से प्रार्थना करने लगे॥
अध्याय का अन्त शेत के वंश और उस समय से लोगों के यहोवा से प्रार्थना करने के उल्लेख के साथ होता है। कैन और हाबिल की घटना के बाद यह एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मोड़ के रूप में सामने आता है।
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