राजाओं का युद्ध और सदोम की पराजय
पद 1–121शिनार के राजा अम्रापेल, और एल्लासार के राजा अर्योक, और एलाम के राजा कदोर्लाओमेर, और गोयीम के राजा तिदाल के दिनों में ऐसा हुआ, 2कि उन्होंने सदोम के राजा बेरा, और अमोरा के राजा बिर्शा, और अदमा के राजा शिनाब, और सबोयीम के राजा शेमेबेर, और बेला जो सोअर भी कहलाता है, इन राजाओं के विरुद्ध युद्ध किया। 3इन पांचों ने सिद्दीम नाम तराई में, जो खारे ताल के पास है, एका किया। 4बारह वर्ष तक तो ये कदोर्लाओमेर के आधीन रहे; पर तेरहवें वर्ष में उसके विरुद्ध उठे। 5सो चौदहवें वर्ष में कदोर्लाओमेर, और उसके संगी राजा आए, और अशतरोत्कनम में रपाइयों को, और हाम में जूजियों को, और शबेकिर्यातैम में एमियों को, 6और सेईर नाम पहाड़ में होरियों को, मारते मारते उस एल्पारान तक जो जंगल के पास है पहुंच गए। 7वहां से वे लौट कर एन्मिशपात को आए, जो कादेश भी कहलाता है, और अमालेकियों के सारे देश को, और उन एमोरियों को भी जीत लिया, जो हससोन्तामार में रहते थे। 8तब सदोम, अमोरा, अदमा, सबोयीम, और बेला, जो सोअर भी कहलाता है, इनके राजा निकले, और सिद्दीम नाम तराई में, उनके साथ युद्ध के लिये पांति बान्धी। 9अर्थात एलाम के राजा कदोर्लाओमेर, गोयीम के राजा तिदाल, शिनार के राजा अम्रापेल, और एल्लासार के राजा अर्योक, इन चारों के विरुद्ध उन पांचों ने पांति बान्धी। 10सिद्दीम नाम तराई में जहां लसार मिट्टी के गड़हे ही गड़हे थे; सदोम और अमोरा के राजा भागते भागते उन में गिर पड़े, और जो बचे वे पहाड़ पर भाग गए। 11तब वे सदोम और अमोरा के सारे धन और भोजन वस्तुओं को लूट लाट कर चले गए। 12और अब्राम का भतीजा लूत, जो सदोम में रहता था; उसको भी धन समेत वे ले कर चले गए।
इस भाग में अनेक राजाओं के बीच संघर्ष होता है और सदोम-अमोरा की पराजय के साथ लूत भी बन्दी बना लिया जाता है। यही घटना आगे अब्राम के हस्तक्षेप का कारण बनती है।
अब्राम का लूत को छुड़ाने के लिये युद्ध करना
पद 13–1613तब एक जन जो भाग कर बच निकला था उसने जा कर इब्री अब्राम को समाचार दिया; अब्राम तो एमोरी माम्रे, जो एश्कोल और आनेर का भाई था, उसके बांज वृक्षों के बीच में रहता था; और ये लोग अब्राम के संग वाचा बान्धे हुए थे। 14यह सुनकर कि उसका भतीजा बन्धुआई में गया है, अब्राम ने अपने तीन सौ अठारह शिक्षित, युद्ध कौशल में निपुण दासों को ले कर जो उसके कुटुम्ब में उत्पन्न हुए थे, अस्त्र शस्त्र धारण करके दान तक उनका पीछा किया। 15और अपने दासों के अलग अलग दल बान्धकर रात को उन पर चढ़ाई करके उन को मार लिया और होबा तक, जो दमिश्क की उत्तर ओर है, उनका पीछा किया। 16और सारे धन को, और अपने भतीजे लूत, और उसके धन को, और स्त्रियों को, और सब बन्धुओं को, लौटा ले आया।
अब्राम ने लूत की परिस्थिति को सुनकर केवल प्रतीक्षा नहीं की, बल्कि उसे छुड़ाने के लिये अपने लोगों के साथ आगे बढ़ा। परिवार के प्रति उसकी जिम्मेदारी इस घटना में स्पष्ट दिखाई देती है।
अब्राम की विजय और मेल्कीसेदेक की भेंट
पद 17–2017जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को जीत कर लौटा आता था तब सदोम का राजा शावे नाम तराई में, जो राजा की भी कहलाती है, उससे भेंट करने के लिये आया। 18जब शालेम का राजा मेल्कीसेदेक, जो परमप्रधान ईश्वर का याजक था, रोटी और दाखमधु ले आया। 19और उसने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया, कि परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो। 20और धन्य है परमप्रधान ईश्वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है। तब अब्राम ने उसको सब का दशमांश दिया।
विजय के बाद मेल्कीसेदेक अब्राम के सामने परमप्रधान ईश्वर की ओर से आशीर्वाद लेकर आता है। अब्राम की प्रतिक्रिया में परमेश्वर के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाई देती है।
सदोम के राजा के धन का अब्राम द्वारा अस्वीकार
पद 21–2421जब सदोम के राजा ने अब्राम से कहा, प्राणियों को तो मुझे दे, और धन को अपने पास रख। 22अब्राम ने सदोम के राजा से कहा, परमप्रधान ईश्वर यहोवा, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, 23उसकी मैं यह शपथ खाता हूं, कि जो कुछ तेरा है उस में से न तो मैं एक सूत, और न जूती का बन्धन, न कोई और वस्तु लूंगा; कि तू ऐसा न कहने पाए, कि अब्राम मेरे ही कारण धनी हुआ। 24पर जो कुछ इन जवानों ने खा लिया है और उनका भाग जो मेरे साथ गए थे; अर्थात आनेर, एश्कोल, और माम्रे मैं नहीं लौटाऊंगा वे तो अपना अपना भाग रख लें॥
अब्राम ने अपनी समृद्धि का श्रेय सदोम के राजा से मिलने वाले धन को देने का अवसर स्वीकार नहीं किया। उसने अपने लिये उस सम्पत्ति को लेने से इनकार किया और अपने साथियों के उचित भाग को अलग रखा।
विजय के बाद परमप्रधान परमेश्वर की गवाही
पद 18–24इस अध्याय के अन्तिम प्रसंग में अब्राम की विजय, मेल्कीसेदेक का आशीर्वाद और सदोम के राजा के सामने अब्राम का निर्णय एक साथ दिखाई देते हैं। अब्राम अपनी विजय और समृद्धि को परमप्रधान ईश्वर से अलग करके नहीं देखता, और इसी कारण वह सदोम के राजा से मिलने वाले लाभ को अपने लिये स्वीकार करने से स्पष्ट रूप से इनकार करता है।
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