याकूब द्वारा एप्रैम और मनश्शे को अपने पुत्र मानना
पद 1–71इन बातों के पश्चात किसी ने यूसुफ से कहा, सुन, तेरा पिता बीमार है; तब वह मनश्शे और एप्रैम नाम अपने दोनों पुत्रों को संग ले कर उसके पास चला। 2और किसी ने याकूब को बता दिया, कि तेरा पुत्र यूसुफ तेरे पास आ रहा है; तब इस्राएल अपने को सम्भाल कर खाट पर बैठ गया। 3और याकूब ने यूसुफ से कहा, सर्वशक्तिमान ईश्वर ने कनान देश के लूज नगर के पास मुझे दर्शन देकर आशीष दी, 4और कहा, सुन, मैं तुझे फुला-फलाकर बढ़ाऊंगा, और तुझे राज्य राज्य की मण्डली का मूल बनाऊंगा, और तेरे पश्चात तेरे वंश को यह देश दे दूंगा, जिस से कि वह सदा तक उनकी निज भूमि बनी रहे।
5और अब तेरे दोनों पुत्र, जो मिस्र में मेरे आने से पहिले उत्पन्न हुए हैं, वे मेरे ही ठहरेंगे; अर्थात जिस रीति से रूबेन और शिमोन मेरे हैं, उसी रीति से एप्रैम और मनश्शे भी मेरे ठहरेंगे। 6और उनके पश्चात जो सन्तान उत्पन्न हो, वह तेरे तो ठहरेंगे; परन्तु बंटवारे के समय वे अपने भाइयों ही के वंश में गिने जाएंगे। 7जब मैं पद्दान से आता था, तब एप्राता पहुंचने से थोड़ी ही दूर पहिले राहेल कनान देश में, मार्ग में, मेरे साम्हने मर गई: और मैं ने उसे वहीं, अर्थात एप्राता जो बेतलेहम भी कहलाता है, उसी के मार्ग में मिट्टी दी।
याकूब द्वारा यूसुफ के पुत्रों को आशीर्वाद देना
पद 8–168तब इस्राएल को यूसुफ के पुत्र देख पड़े, और उसने पूछा, ये कौन हैं? 9यूसुफ ने अपने पिता से कहा, ये मेरे पुत्र हैं, जो परमेश्वर ने मुझे यहां दिए हैं: उसने कहा, उन को मेरे पास ले आ कि मैं उन्हें आशीर्वाद दूं। 10इस्राएल की आंखें बुढ़ापे के कारण धुन्धली हो गई थीं, यहां तक कि उसे कम सूझता था। तब यूसुफ उन्हें उनके पास ले गया; और उसने उन्हें चूमकर गले लगा लिया। 11तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, मुझे आशा न थी, कि मैं तेरा मुख फिर देखने पाऊंगा: परन्तु देख, परमेश्वर ने मुझे तेरा वंश भी दिखाया है।
12तब यूसुफ ने उन्हें अपने घुटनों के बीच से हटाकर और अपने मुंह के बल भूमि पर गिर के दण्डवत की। 13तब यूसुफ ने उन दोनों को लेकर, अर्थात एप्रैम को अपने दाहिने हाथ से, कि वह इस्राएल के बाएं हाथ पड़े, और मनश्शे को अपने बाएं हाथ से, कि इस्राएल के दाहिने हाथ पड़े, उन्हें उसके पास ले गया। 14तब इस्राएल ने अपना दाहिना हाथ बढ़ाकर एप्रैम के सिर पर जो छोटा था, और अपना बायां हाथ बढ़ाकर मनश्शे के सिर पर रख दिया; उसने तो जान बूझकर ऐसा किया; नहीं तो जेठा मनश्शे ही था।
15फिर उसने यूसुफ को आशीर्वाद देकर कहा, परमेश्वर जिसके सम्मुख मेरे बापदादे इब्राहीम और इसहाक (अपने को जानकर) चलते थे वही परमेश्वर मेरे जन्म से ले कर आज के दिन तक मेरा चरवाहा बना है; 16और वही दूत मुझे सारी बुराई से छुड़ाता आया है, वही अब इन लड़कों को आशीष दे; और ये मेरे और मेरे बापदादे इब्राहीम और इसहाक के कहलाएं; और पृथ्वी में बहुतायत से बढ़ें।
एप्रैम को जेठे से बड़ा आशीर्वाद
पद 17–2017जब यूसुफ ने देखा, कि मेरे पिता ने अपना दाहिना हाथ एप्रैम के सिर पर रखा है, तब यह बात उसको बुरी लगी: सो उसने अपने पिता का हाथ इस मनसा से पकड़ लिया, कि एप्रैम के सिर पर से उठा कर मनश्शे के सिर पर रख दे। 18और यूसुफ ने अपने पिता से कहा, हे पिता, ऐसा नहीं: क्योंकि जेठा यही है; अपना दाहिना हाथ इसके सिर पर रख। 19उसके पिता ने कहा, नहीं, सुन, हे मेरे पुत्र, मैं इस बात को भली भांति जानता हूं: यद्यपि इस से भी मनुष्यों की एक मण्डली उत्पन्न होगी, और यह भी महान हो जाएगा, तौभी इसका छोटा भाई इस से अधिक महान हो जाएगा, और उसके वंश से बहुत सी जातियां निकलेंगी। 20फिर उसने उसी दिन यह कहकर उन को आशीर्वाद दिया, कि इस्राएली लोग तेरा नाम ले ले कर ऐसा आशीर्वाद दिया करेंगे, कि परमेश्वर तुझे एप्रैम और मनश्शे के समान बना दे: और उसने मनश्शे से पहिले एप्रैम का नाम लिया।
याकूब की अंतिम प्रतिज्ञा और यूसुफ को भूमि का भाग
पद 21–2221तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, देख, मैं तो मरने पर हूं: परन्तु परमेश्वर तुम लोगों के संग रहेगा, और तुम को तुम्हारे पितरों के देश में फिर पहुंचा देगा। 22और मैं तुझ को तेरे भाइयों से अधिक भूमि का एक भाग देता हूं, जिस को मैं ने एमोरियों के हाथ से अपनी तलवार और धनुष के बल से ले लिया है।
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