क्या पास्टर को 'Spiritual Father' कहना सही है?
एक ऐसा सवाल जिसने बहुतों को उलझन में डाल दिया है…
अक्सर मसीही समाज में यह बहस छिड़ती है कि क्या हम अपने पास्टर, गुरु या किसी परमेश्वर के दास को ‘Spiritual Father’ कह सकते हैं? कुछ लोग मत्ती 23:9 का हवाला देकर इसे गलत बताते हैं, तो कुछ एलीशा और पौलुस का उदाहरण देते हैं।
आज हम इस लेख में भावनाओं से नहीं, बल्कि बाइबल के ठोस सबूतों से इस रहस्य को सुलझाएंगे।
तर्क #1: यीशु ने क्या कहा था? (The Common Confusion)
मत्ती 23:9 में यीशु कहते हैं— “पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, क्योंकि तुम्हारा एक ही पिता है जो स्वर्ग में है।”
सच क्या है? अगर हम इस आयत को शब्दशः (Literally) लें, तो हमें अपने सगे (Biological) पिता को भी ‘पिता’ नहीं कहना चाहिए। लेकिन यीशु यहाँ ‘पाखंडी फरीसियों’ को डांट रहे थे जो ऊंचे पद और आदर की लालसा रखते थे। यीशु का मतलब यह था कि कोई भी इंसान परमेश्वर की जगह नहीं ले सकता।
तर्क #2: एलीशा ने एलिय्याह को 'पिता' क्यों कहा? (The Heritage)
जब एलिय्याह स्वर्ग की ओर उठा लिया जा रहा था, तो एलीशा चिल्लाया:
“हे मेरे पिता, हे मेरे पिता, हे इस्राएल के रथ और उसके सवारों!” (2 राजाओं 2:12)
यहाँ एलीशा कोई पाप नहीं कर रहा था। वह उस ‘अभिषेक’ (Anointing) और ‘रिश्ते’ का सम्मान कर रहा था जो एक चेले और उसके गुरु के बीच होता है। आत्मिक पिता वह है जो आपको आत्मिक रूप से जन्म देता है और पोषण करता है।
तर्क #3: प्रेरित पौलुस का सबसे बड़ा दावा (The Apostolic Authority)
प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थियों की कलीसिया को एक बहुत ही गहरी बात लिखी:
“चाहे मसीह में तुम्हारे दस हज़ार उस्ताद (Teachers) क्यों न हों, पर पिता बहुत से नहीं; क्योंकि मसीह यीशु में सुसमाचार के द्वारा मैं तुम्हारा पिता हुआ।“ (1 कुरिन्थियों 4:15)
पौलुस यहाँ स्पष्ट कर रहे हैं कि सिखाने वाले बहुत हो सकते हैं, लेकिन ‘पिता’ वही है जिसने आपको सुसमाचार सुनाकर मसीह की राह पर चलना सिखाया।
आत्मिक पिता और परमेश्वर में क्या अंतर है?
इसे समझना बहुत ज़रूरी है:
परमेश्वर (Abba Father): वह हमारा सृष्टिकर्ता है, हमारी आराधना का एकमात्र हकदार।
आत्मिक पिता (Spiritual Father): वह एक ‘मेंटर’ या ‘कोच’ की तरह है जो हमें परमेश्वर के करीब ले जाता है।
उदाहरण: जैसे चंद्रमा सूरज की रोशनी को परावर्तित (Reflect) करता है, वैसे ही एक आत्मिक पिता परमेश्वर के प्रेम को आप तक पहुँचाता है।
बाइबल के अनुसार, अपने आत्मिक मार्गदर्शकों को ‘पिता’ कहना या उन्हें सम्मान देना गलत नहीं है, बशर्ते हम उन्हें परमेश्वर की जगह न दें। एक सच्चा आत्मिक पिता हमेशा आपको अपनी ओर नहीं, बल्कि मसीह की ओर मोड़ेगा।

