झोले के मारे हुए को चंगाई और पाप क्षमा करने का अधिकार
पद 1–121कई दिन के बाद वह फिर कफरनहूम में आया और सुना गया, कि वह घर में है। 2फिर इतने लोग इकट्ठे हुए, कि द्वार के पास भी जगह नहीं मिली; और वह उन्हें वचन सुना रहा था। 3और लोग एक झोले के मारे हुए को चार मनुष्यों से उठवाकर उसके पास ले आए। 4परन्तु जब वे भीड़ के कारण उसके निकट न पहुँच सके, तो उन्होंने उस छत को जिस के नीचे वह था, खोल दिया और जब उसे उधेड़ चुके, तो उस खाट को जिस पर झोले का मारा हुआ पड़ा था, लटका दिया। 5यीशु ने, उन का विश्वास देखकर, उस झोले के मारे हुए से कहा; हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए। 6तब कई एक शास्त्री जो वहां बैठे थे, अपने अपने मन में विचार करने लगे। 7कि यह मनुष्य क्यों ऐसा कहता है? यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है, परमेश्वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?
“हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।”
8यीशु ने तुरन्त अपनी आत्मा में जान लिया, कि वे अपने अपने मन में ऐसा विचार कर रहे हैं, और उन से कहा, तुम अपने अपने मन में यह विचार क्यों कर रहे हो? 9सहज क्या है? क्या झोले के मारे से यह कहना कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना, कि उठ अपनी खाट उठा कर चल फिर? 10परन्तु जिस से तुम जान लो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है (उस ने उस झोले के मारे हुए से कहा)। 11मैं तुझ से कहता हूं; उठ, अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा। 12और वह उठा, और तुरन्त खाट उठाकर और सब के साम्हने से निकलकर चला गया, इस पर सब चकित हुए, और परमेश्वर की बड़ाई करके कहने लगे, कि हम ने ऐसा कभी नहीं देखा॥
इस घटना में यीशु केवल शारीरिक चंगाई ही नहीं दिखाते, बल्कि यह भी प्रकट करते हैं कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है। दिखाई देने वाली चंगाई उस अदृश्य अधिकार की पुष्टि बन जाती है।
लेवी को बुलाना और पापियों के साथ यीशु का भोजन
पद 13–1713वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्हें उपदेश देने लगा। 14जाते हुए उस ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा; मेरे पीछे हो ले। 15और वह उठकर, उसके पीछे हो लिया: और वह उसके घर में भोजन करने बैठा, और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। 16और शास्त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ भोजन कर रहा है, उसके चेलों से कहा; वह तो चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ खाता पीता है!! 17यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं॥
“मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।”
यीशु उन लोगों से दूर नहीं होते जिन्हें समाज पापी या अयोग्य समझता है। उनका बुलावा ऐसे लोगों को बदलने और अपने पीछे चलने के लिये है।
उपवास और नये दाखरस की शिक्षा
पद 18–2218यूहन्ना के चेले, और फरीसी उपवास करते थे; सो उन्होंने आकर उस से यह कहा; कि यूहन्ना के चेले और फरीसियों के चेले क्यों उपवास रखते हैं? परन्तु तेरे चेले उपवास नहीं रखते। 19यीशु ने उन से कहा, जब तक दुल्हा बरातियों के साथ रहता है क्या वे उपवास कर सकते हैं? सो जब तक दूल्हा उन के साथ है, तब तक वे उपवास नहीं कर सकते। 20परन्तु वे दिन आएंगे, कि दूल्हा उन से अलग किया जाएगा; उस समय वे उपवास करेंगे।
“परन्तु वे दिन आएंगे, कि दूल्हा उन से अलग किया जाएगा; उस समय वे उपवास करेंगे।”
21कोरे कपड़े का पैबन्द पुराने पहिरावन पर कोई नहीं लगाता; नहीं तो वह पैबन्द उस में से कुछ खींच लेगा, अर्थात नया, पुराने से, और वह और फट जाएगा। 22नये दाखरस को पुरानी मश्कों में कोई नहीं रखता, नहीं तो दाखरस मश्कों को फाड़ देगा, और दाखरस और मश्कें दोनों नष्ट हो जाएंगी; परन्तु दाख का नया रस नई मश्कों में भरा जाता है॥
यीशु की ये उपमाएं केवल बाहरी धार्मिक रीति में परिवर्तन की बात नहीं करतीं; वे उस नये कार्य की ओर संकेत करती हैं जिसे यीशु के आने के साथ परमेश्वर कर रहा था।
सब्त के दिन बालें तोड़ना
पद 23–2823और ऐसा हुआ कि वह सब्त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था; और उसके चेले चलते हुए बालें तोड़ने लगे। 24तब फरीसियों ने उस से कहा, देख; ये सब्त के दिन वह काम क्यों करते हैं जो उचित नहीं? 25उस ने उन से कहा, क्या तुम ने कभी नहीं पढ़ा, कि जब दाऊद को आवश्यकता हुई और जब वह और उसके साथी भूखे हुए, तब उस ने क्या किया था? 26उस ने क्योंकर अबियातार महायाजक के समय, परमेश्वर के भवन में जाकर, भेंट की रोटियां खाईं, जिसका खाना याजकों को छोड़ और किसी को भी उचित नहीं, और अपने साथियों को भी दीं?
27और उस ने उन से कहा; सब्त का दिन मनुष्य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्य सब्त के दिन के लिये। 28इसलिये मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी स्वामी है॥
“सब्त का दिन मनुष्य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्य सब्त के दिन के लिये। इसलिये मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी स्वामी है।”
इस प्रसंग में यीशु सब्त के महत्व को नकारते नहीं, बल्कि मनुष्य के प्रति परमेश्वर की व्यवस्था के उद्देश्य को सामने रखते हैं। अन्त में वे अपने अधिकार को और स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी स्वामी है।
परमेश्वर के वचन को और लोगों तक पहुँचाएँ
यदि इस सेवकाई के द्वारा आपको परमेश्वर के वचन से आशीष मिली है, तो आपका सहयोग इस संदेश को और लोगों तक पहुँचाने में सहायता कर सकता है।
सेवकाई में सहयोग करें

किसी भी UPI ऐप से QR स्कैन करके सहयोग करें।
0 टिप्पणियाँ