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मत्ती अध्याय 10 — बाइबल पाठ, व्याख्या और मुख्य शिक्षाएँ

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1

बारह प्रेरितों को अधिकार देकर भेजना

पद 1–4

1फिर उस ने अपने बारह चेलों को पास बुलाकर, उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया, कि उन्हें निकालें और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करें॥ 2और बारह प्रेरितों के नाम ये हैं: पहिला शमौन, जो पतरस कहलाता है, और उसका भाई अन्द्रियास; जब्दी का पुत्र याकूब, और उसका भाई यूहन्ना; 3फिलिप्पुस और बर-तुल्मै थोमा और महसूल लेनेवाला मत्ती, हलफै का पुत्र याकूब और तद्दै। 4शमौन कनानी, और यहूदा इस्करियोती, जिस ने उसे पकड़वा भी दिया॥

महत्वपूर्ण • पद 1

“उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया, कि उन्हें निकालें और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करें”

जानने योग्य

यीशु अपने बारह चेलों को केवल शिक्षा देने के लिये नहीं रखते, बल्कि उन्हें सेवकाई के लिये अधिकार देकर भेजते हैं। अध्याय की शुरुआत ही शिष्यत्व और सेवकाई के संबंध को सामने रखती है।

2

बारहों को सेवकाई के लिये निर्देश

पद 5–15

5इन बारहों को यीशु ने यह आज्ञा देकर भेजा कि अन्यजातियों की ओर न जाना, और सामरियों के किसी नगर में प्रवेश न करना। 6परन्तु इस्राएल के घराने ही की खोई हुई भेड़ों के पास जाना। 7और चलते चलते प्रचार कर कहो कि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। 8बीमारों को चंगा करो: मरे हुओं को जिलाओ: कोढ़ियों को शुद्ध करो: दुष्टात्माओं को निकालो: तुम ने सेंतमेंत पाया है, सेंतमेंत दो।

9अपने पटुकों में न तो सोना, और न रूपा, और न तांबा रखना। 10मार्ग के लिये न झोली रखो, न दो कुरते, न जूते और न लाठी लो, क्योंकि मजदूर को उसका भोजन मिलना चाहिए। 11जिस किसी नगर या गांव में जाओ तो पता लगाओ कि वहां कौन योग्य है और जब तक वहां से न निकलो, उसी के यहां रहो। 12और घर में प्रवेश करते हुए उस को आशीष देना। 13यदि उस घर के लोग योग्य होंगे तो तुम्हारा कल्याण उन पर पहुंचेगा परन्तु यदि वे योग्य न हों तो तुम्हारा कल्याण तुम्हारे पास लौट आएगा।

14और जो कोई तुम्हें ग्रहण न करे, और तुम्हारी बातें न सुने, उस घर या उस नगर से निकलते हुए अपने पांवों की धूल झाड़ डालो। 15मैं तुम से सच कहता हूं, कि न्याय के दिन उस नगर की दशा से सदोम और अमोरा के देश की दशा अधिक सहने योग्य होगी॥

महत्वपूर्ण • पद 7–8

“स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। … तुम ने सेंतमेंत पाया है, सेंतमेंत दो।”

आज के लिये सीख

यीशु की ओर से मिली सेवकाई केवल अधिकार पाने की बात नहीं है। जो चेलों ने सेंतमेंत पाया, उसे सेंतमेंत देने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई।

3

सताव के बीच बुद्धिमानी और पवित्र आत्मा पर भरोसा

पद 16–23

16देखो, मैं तुम्हें भेड़ों की नाईं भेड़ियों के बीच में भेजता हूं सो सांपों की नाईं बुद्धिमान और कबूतरों की नाईं भोले बनो। 17परन्तु लोगों से सावधान रहो, क्योंकि वे तुम्हें महासभाओं में सौंपेंगे, और अपनी पंचायत में तुम्हें कोड़े मारेंगे। 18तुम मेरे लिये हाकिमों और राजाओं के साम्हने उन पर, और अन्यजातियों पर गवाह होने के लिये पहुंचाए जाओगे।

महत्वपूर्ण • पद 16

“सांपों की नाईं बुद्धिमान और कबूतरों की नाईं भोले बनो।”

19जब वे तुम्हें पकड़वाएंगे तो यह चिन्ता न करना, कि हम किस रीति से; या क्या कहेंगे: क्योंकि जो कुछ तुम को कहना होगा, वह उसी घड़ी तुम्हें बता दिया जाएगा। 20क्योंकि बोलने वाले तुम नहीं हो परन्तु तुम्हारे पिता का आत्मा तुम में बोलता है। 21भाई, भाई को और पिता पुत्र को, घात के लिये सौंपेंगे, और लड़के-बाले माता-पिता के विरोध में उठकर उन्हें मरवा डालेंगे। 22मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे, पर जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा।

23जब वे तुम्हें एक नगर में सताएं, तो दूसरे को भाग जाना। मैं तुम से सच कहता हूं, तुम इस्राएल के सब नगरों में न फिर चुकोगे कि मनुष्य का पुत्र आ जाएगा॥

गहराई से समझें

यीशु अपने चेलों को सताव की वास्तविकता से अनजान नहीं रखते। साथ ही वे उन्हें चिन्ता में डूबने के बजाय उस समय परमेश्वर के आत्मा पर भरोसा करने की शिक्षा देते हैं।

4

गुरू से बड़ा नहीं चेला और मनुष्यों से नहीं, परमेश्वर से डरना

पद 24–31

24चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं; और न दास अपने स्वामी से। 25चेले का गुरू के, और दास का स्वामी के बराबर होना ही बहुत है; जब उन्होंने घर के स्वामी को शैतान कहा तो उसके घर वालों को क्यों न कहेंगे? 26सो उन से मत डरना, क्योंकि कुछ ढका नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा। 27जो मैं तुम से अन्धियारे में कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो।

28जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। 29क्या पैसे में दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। 30तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। 31इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।

महत्वपूर्ण • पद 31

“इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।”

जानने योग्य

गौरैयों का उदाहरण एक गहरी बात सामने रखता है—यदि परमेश्वर छोटी और साधारण समझी जाने वाली चीजों पर भी ध्यान रखता है, तो उसके लोग उसके लिये कितने अधिक मूल्यवान हैं।

5

मनुष्यों के सामने मसीह को मानना और उसका इन्कार न करना

पद 32–33

32जो कोई मनुष्यों के साम्हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के साम्हने मान लूंगा। 33पर जो कोई मनुष्यों के साम्हने मेरा इन्कार करेगा उस से मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के साम्हने इन्कार करूंगा।

महत्वपूर्ण • पद 32

“जो कोई मनुष्यों के साम्हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के साम्हने मान लूंगा।”

6

मसीह को सबसे अधिक प्रिय मानने की कीमत

पद 34–39

34यह न समझो, कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने को आया हूं; मैं मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूं। 35मैं तो आया हूं, कि मनुष्य को उसके पिता से, और बेटी को उस की मां से, और बहू को उस की सास से अलग कर दूं। 36मनुष्य के बैरी उसके घर ही के लोग होंगे।

37जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं। 38और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं। 39जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा।

महत्वपूर्ण • पद 38–39

“जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं। … जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा।”

गहराई से समझें

यहाँ यीशु शिष्यत्व की कीमत को स्पष्ट करते हैं। उसके पीछे चलना केवल विश्वास की घोषणा नहीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं, सुविधा और यहां तक कि अपने प्राण से भी अधिक उसे महत्व देने का आह्वान है।

7

जो मसीह के जनों को ग्रहण करता है उसका प्रतिफल

पद 40–42

40जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है। 41जो भविष्यद्वक्ता को भविष्यद्वक्ता जानकर ग्रहण करे, वह भविष्यद्वक्ता का बदला पाएगा; और जो धर्मी जानकर धर्मी को ग्रहण करे, वह धर्मी का बदला पाएगा। 42जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूं, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा॥

महत्वपूर्ण • पद 42

“जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए … वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा॥”

आज के लिये सीख

अध्याय का समापन यह दिखाता है कि परमेश्वर की दृष्टि में सेवा केवल बड़े कामों तक सीमित नहीं है। एक छोटा-सा कार्य भी, यदि वह उसके जनों के लिये किया गया है, उसके सामने मूल्य रखता है।

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