Apostle Vinod KumarApostle Vinod KumarApostle Vinod Kumar

पुराने नियम की व्यवस्था कितनी प्रकार की थी?

  • Home
  • Bible Study
  • पुराने नियम की व्यवस्था कितनी प्रकार की थी?
camp of israelites

जब हम पुराने नियम की व्यवस्था पढ़ते हैं, तो हमें बहुत अलग-अलग प्रकार की आज्ञाएँ दिखाई देती हैं। कहीं हत्या, चोरी और झूठ के बारे में आज्ञाएँ हैं; कहीं बलिदान और याजकों के बारे में निर्देश हैं; कहीं भोजन को शुद्ध और अशुद्ध बताया गया है; कहीं सब्त और त्योहारों के विषय में बातें हैं; और कहीं सामाजिक विवादों तथा दण्ड से संबंधित नियम दिए गए हैं। इसलिए एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है—क्या ये सभी व्यवस्थाएँ एक ही प्रकार की थीं?

इस प्रश्न का उत्तर समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यदि हम पुराने नियम की हर आज्ञा को एक ही स्तर पर रख देंगे, तो आगे बहुत भ्रम पैदा होगा। उदाहरण के लिए, “तू हत्या न करना” और किसी विशेष प्रकार का भोजन न खाने की आज्ञा दोनों परमेश्वर की ओर से थीं, लेकिन उनका उद्देश्य और परिस्थिति एक जैसी नहीं थी। इसी तरह बलिदान की व्यवस्था और किसी सामाजिक विवाद के समाधान से संबंधित नियम को भी एक ही दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।

सबसे पहले एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट कर दें। बाइबल स्वयं पुराने नियम की सारी व्यवस्थाओं को हमारी सुविधा के लिए तीन या चार अलग-अलग नामों में बाँटकर नहीं देती। नैतिक, सामाजिक और आराधना संबंधी व्यवस्था जैसी श्रेणियाँ बाद में बाइबल को समझने के लिए बनाई गई एक उपयोगी पद्धति हैं। इनका उद्देश्य यह दिखाना है कि अलग-अलग व्यवस्थाओं का उद्देश्य क्या था। इसलिए इन्हें बाइबल की अपनी कोई अलग सूची समझने के बजाय समझने के एक साधन के रूप में देखना चाहिए।

नैतिक जीवन से संबंधित व्यवस्थाएँ

व्यवस्था का एक बड़ा भाग मनुष्य के नैतिक जीवन से संबंधित था। हत्या न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, व्यभिचार से दूर रहना और दूसरे की वस्तु का लालच न करना जैसी आज्ञाएँ मनुष्य के व्यवहार और उसके चरित्र से जुड़ी थीं। इन व्यवस्थाओं के पीछे केवल सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की बात नहीं थी, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सही और गलत को स्पष्ट करना भी था।

उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की हत्या करना केवल राज्य के नियम को तोड़ना नहीं था; मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया है, इसलिए मानव जीवन का अपना विशेष मूल्य है। इसी प्रकार झूठी गवाही या चोरी दूसरे व्यक्ति के अधिकार और सम्मान को चोट पहुँचाती है। ऐसी व्यवस्थाएँ हमें यह समझने में सहायता करती हैं कि परमेश्वर अपने लोगों से किस प्रकार के चरित्र और व्यवहार की अपेक्षा करता था।

यही कारण है कि पुराने नियम की व्यवस्था को केवल बाहरी धार्मिक रस्मों की पुस्तक समझना गलत होगा। इसमें मनुष्य के हृदय और उसके व्यवहार दोनों से संबंधित बातें थीं।

आराधना और बलिदान से संबंधित व्यवस्थाएँ

व्यवस्था का दूसरा महत्वपूर्ण भाग परमेश्वर की आराधना से संबंधित था। इसमें मिलाप का तम्बू, याजक, वेदी, विभिन्न प्रकार के बलिदान और आराधना से जुड़ी अनेक विधियाँ शामिल थीं। इस व्यवस्था के द्वारा इस्राएल को यह बताया गया कि वे परमेश्वर के सामने किस प्रकार आराधना करें और उनके बीच पवित्र स्थान तथा याजक की क्या भूमिका हो।

यहीं से रक्त और पशु बलिदान का कठिन विषय सामने आता है। पुराने नियम में अलग-अलग प्रकार के बलिदानों का उल्लेख मिलता है और हर बलिदान का उद्देश्य बिल्कुल समान नहीं था। इसलिए केवल इतना कहना कि “हर बलिदान पाप की क्षमा के लिए था” पूरी व्यवस्था को ठीक से नहीं समझाता।

रक्त और पशु बलिदान की व्यवस्था क्यों दी गई थी, यह इतना महत्वपूर्ण विषय है कि हमारी श्रृंखला में इसके लिए अलग लेख रखा गया है। वहाँ हम इस प्रश्न को विस्तार से देखेंगे कि जीवन, रक्त, पाप, मृत्यु और प्रायश्चित के बीच बाइबल क्या संबंध बताती है।

सामाजिक और न्याय से संबंधित व्यवस्थाएँ

इस्राएल केवल धार्मिक लोगों का समूह नहीं था; वे एक संगठित प्रजा के रूप में रहते थे। इसलिए उनकी सामाजिक व्यवस्था और न्याय के लिए भी अनेक नियम दिए गए। किसी व्यक्ति ने दूसरे को नुकसान पहुँचाया, किसी की वस्तु को नुकसान पहुँचा, चोरी हुई या किसी विवाद की स्थिति बनी, तो ऐसी परिस्थितियों के लिए भी निर्देश मौजूद थे।

इन व्यवस्थाओं को समझते समय हमें यह याद रखना चाहिए कि इस्राएल उस समय एक विशेष वाचा के अंतर्गत रहने वाली प्रजा थी। इसलिए उनके सामाजिक और न्यायिक नियमों को सीधे आज के प्रत्येक देश के कानून के बराबर रखना सही नहीं होगा। हमें यह देखना होगा कि उस समय परमेश्वर ने इस्राएली समाज को किस प्रकार व्यवस्थित किया था और उन व्यवस्थाओं का उद्देश्य क्या था।

शुद्ध और अशुद्ध से संबंधित व्यवस्थाएँ

पुराने नियम में ऐसी अनेक व्यवस्थाएँ भी हैं जो शुद्ध और अशुद्ध होने से संबंधित हैं। कुछ भोजन शुद्ध माने गए और कुछ अशुद्ध। कुछ शारीरिक परिस्थितियों में व्यक्ति को कुछ समय के लिए अशुद्ध माना जाता था। ऐसी व्यवस्थाएँ पढ़ते समय आधुनिक पाठक के मन में तुरंत प्रश्न आता है—क्या इसका अर्थ यह है कि आज भी मसीही व्यक्ति को इन्हीं नियमों के अनुसार भोजन और दैनिक जीवन चलाना चाहिए?

इस प्रश्न का उत्तर केवल पुराने नियम की एक आज्ञा पढ़कर नहीं दिया जा सकता। हमें यह देखना होगा कि ये व्यवस्थाएँ इस्राएल की आराधना, पहचान और उस समय की वाचा में क्या भूमिका निभाती थीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि बाद में यीशु और प्रेरितों ने शुद्ध और अशुद्ध के विषय को किस प्रकार समझाया।

इसी कारण हमने इस श्रृंखला में भोजन और शुद्ध-अशुद्ध से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए एक अलग लेख रखा है।

सब्त, त्योहार और विशेष दिन

व्यवस्था में सब्त और विभिन्न पर्वों तथा विशेष दिनों के विषय में भी निर्देश दिए गए थे। इनका संबंध केवल “उस दिन काम करना है या नहीं” से नहीं था। इन दिनों के द्वारा इस्राएल को परमेश्वर की आराधना, उसकी आज्ञाओं, उनके इतिहास और परमेश्वर के साथ उनकी वाचा की याद दिलाई जाती थी।

इसलिए सब्त और त्योहारों को समझते समय भी हमें उनके पूरे संदर्भ को देखना होगा। बाद में यीशु की शिक्षा और नए नियम की घटनाएँ इस विषय को समझने में और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

तो क्या आज हमें पुराने नियम की हर व्यवस्था माननी चाहिए?

यहीं इस पूरे विषय का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न आता है। यदि ये सभी व्यवस्थाएँ परमेश्वर ने दी थीं, तो क्या आज मसीही व्यक्ति को इन सभी का उसी प्रकार पालन करना चाहिए?

इसका उत्तर “हाँ” या “नहीं” में तुरंत देना उचित नहीं होगा। हमें पहले यह समझना होगा कि कौन-सी व्यवस्था किस उद्देश्य के लिए दी गई थी, वह किस वाचा का हिस्सा थी और बाइबल की आगे की शिक्षा में उसका क्या स्थान है।

पिछले लेख में हमने देखा था कि मूसा की व्यवस्था से पहले अब्राहम के साथ परमेश्वर का संबंध और उसकी प्रतिज्ञा एक महत्वपूर्ण भूमिका रखते थे। उसी तरह अब हमें यह भी समझना होगा कि मूसा की व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों का उद्देश्य एक जैसा नहीं था।

यही कारण है कि पुराने नियम की व्यवस्था को समझने का सही तरीका केवल यह पूछना नहीं है कि “क्या यह आज भी लागू है?” बल्कि पहले यह पूछना है—यह व्यवस्था क्यों दी गई थी? इसका उद्देश्य क्या था? यह किस वाचा के अंतर्गत थी? और बाद में बाइबल ने इसे किस प्रकार समझाया?

जब हम इस तरीके से अध्ययन करते हैं, तो पुराने नियम की बहुत-सी कठिन बातें धीरे-धीरे अपनी जगह पर दिखाई देने लगती हैं। और फिर हम उस बड़े प्रश्न की ओर बढ़ सकते हैं जो शायद सबसे अधिक लोगों के मन में है—परमेश्वर ने रक्त और पशु बलिदान की व्यवस्था आखिर क्यों दी थी?

आगे पढ़ें:

परमेश्वर को रक्त और पशु बलिदान की आवश्यकता क्यों थी?

इस सेवकाई को सहयोग करें

यदि आप इस वेबसाइट के माध्यम से परमेश्वर के वचन को समझने, सीखने और अपने विश्वास में बढ़ने के लिए आशीष पा रहे हैं, तो आप इस सेवकाई को अपने सहयोग के द्वारा आगे बढ़ाने में सहभागी बन

judi bola judi bola sabung ayam judi bola sabung ayam judi bola slot mahjong sabung ayam live casino sabung ayam judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola mix parlay sabung ayam judi bola judi bola online sabung ayam judi bola sabung ayam judi bola sabung ayam live casino judi bola judi bola judi bola sabung ayam judi bola judi bola sabung ayam online sabung ayam judi bola judi bola live casino judi bola slot mahjong judi bola judi bola judi bola judi bola sabung ayam judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola sabung ayam judi bola sabung ayam live casino mix parlay judi bola judi bola live casino live casino live casino judi bola live casino judi bola judi bola live casino judi bola judi bola judi bola judi bola live casino judi bola live casino sabung ayam judi bola live casino judi bola judi bola judi bola sabung ayam live casino judi bola judi bola live casino judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola mix parlay judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola online mix parlay judi bola judi bola judi bola mix parlay judi bola mix parlay sabung ayam online sabung ayam mix parlay judi bola mix parlay mix parlay sabung ayam mix parlay mix parlay judi bola mix parlay sabung ayam live casino judi bola live casino judi bola judi bola live casino sabung ayam judi bola parlay judi bola judi bola judi bola slot mahjong judi bola live casino judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola parlay mix parlay mix parlay sabung ayam live casino slot mahjong mix parlay sabung ayam mix parlay mix parlay judi bola mix parlay mix parlay mix parlay judi bola judi bola judi bola mix parlay mix parlay mix parlay live casino online mix parlay mix parlay casino online judi bola judi bola indobola77 judi bola judi bola judi bola judi bola judi bola live casino online sabung ayam online sabung ayam online sabung ayam online sabung ayam online sabung ayam online live casino online sabung ayam online live casino online judi bola judi bola casino online sabung ayam online sabung ayam online sabung ayam online sabung ayam online judi bola sabung ayam online indobola77
sbobet88 sabung ayam online slot mahjong mix parlay sv388