उत्पत्ति (Genesis)
प्रश्न 1: उत्पत्ति की पुस्तक में सृष्टि की रचना कितने दिनों में पूरी हुई?
उत्तर: छह दिनों में, और सातवें दिन परमेश्वर ने विश्राम किया। (उत्पत्ति 2:2)
प्रश्न 2: परमेश्वर ने आदम और हव्वा को किस वृक्ष का फल न खाने की आज्ञा दी थी?
उत्तर: भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का। (उत्पत्ति 2:16-17)
प्रश्न 3: परमेश्वर ने नूह से क्या करने के लिए कहा?
उत्तर: एक जहाज (आर्क) बनाने के लिए, ताकि वह और उसके परिवारजन जलप्रलय से बच सकें। (उत्पत्ति 6:14-22)
प्रश्न 4: अब्राहम की परीक्षा कैसे हुई?
उत्तर: परमेश्वर ने उसे अपने बेटे इसहाक को बलिदान करने के लिए कहा। (उत्पत्ति 22:1-2)
प्रश्न 5: यूसुफ को उसके भाइयों ने किसके हाथों बेच दिया था?
उत्तर: इस्माएली व्यापारियों के हाथों। (उत्पत्ति 37:28)
निर्गमन (Exodus)
प्रश्न 1: परमेश्वर ने मूसा को कहाँ पर जलती हुई झाड़ी के माध्यम से बुलाया?
उत्तर: होरेब पर्वत पर। (निर्गमन 3:1-4)
प्रश्न 2: मिस्र में परमेश्वर ने कितनी विपत्तियाँ भेजीं?
उत्तर: दस विपत्तियाँ। (निर्गमन 7-12)
प्रश्न 3: इस्राएलियों ने लाल समुद्र कैसे पार किया?
उत्तर: परमेश्वर ने समुद्र को दो भागों में विभाजित कर दिया, और वे सूखी भूमि पर चले गए। (निर्गमन 14:21-22)
प्रश्न 4: परमेश्वर ने सीनै पर्वत पर इस्राएलियों को कौन सी प्रमुख आज्ञाएँ दीं?
उत्तर: दस आज्ञाएँ। (निर्गमन 20:1-17)
प्रश्न 5: इस्राएलियों ने परमेश्वर के विरुद्ध किस प्रकार पाप किया जब मूसा पर्वत पर था?
उत्तर: उन्होंने सोने का बछड़ा बनाकर उसकी पूजा की। (निर्गमन 32:4-6)
लैव्यवस्था (Leviticus)
प्रश्न 1: लैव्यवस्था पुस्तक मुख्य रूप से किसके बारे में है?
उत्तर: याजकीय व्यवस्था, बलिदान, और पवित्रता के नियम।
प्रश्न 2: लैव्यवस्था 11 में परमेश्वर ने क्या निर्देश दिए?
उत्तर: स्वच्छ और अशुद्ध भोजन के नियम।
प्रश्न 3: महायाजक वर्ष में कितनी बार परमपवित्र स्थान में प्रवेश कर सकता था?
उत्तर: एक बार, प्रायश्चित्त दिवस पर। (लैव्यवस्था 16:2-34)
प्रश्न 4: परमेश्वर ने इस्राएलियों को क्यों पवित्र रहने की आज्ञा दी?
उत्तर: क्योंकि वह स्वयं पवित्र है। (लैव्यवस्था 19:2)
प्रश्न 5: लैव्यवस्था 25 में कौन सा महत्वपूर्ण वर्ष उल्लेखित है?
उत्तर: जुबली वर्ष, जब भूमि को विश्राम दिया जाता था और दास मुक्त किए जाते थे।
गिनती (Numbers)
प्रश्न 1: गिनती पुस्तक में मुख्य रूप से किसकी गिनती की गई?
उत्तर: इस्राएली गोत्रों के पुरुषों की गिनती, जो युद्ध के योग्य थे।
प्रश्न 2: जब इस्राएली वादा किए गए देश में प्रवेश करने के लिए भेजे गए गुप्तचरों की रिपोर्ट मिली, तो कितने गुप्तचर डर गए?
उत्तर: दस गुप्तचर। (गिनती 13:31-33)
प्रश्न 3: कौन से दो गुप्तचर विश्वासयोग्य बने रहे?
उत्तर: कालेब और यहोशू। (गिनती 14:6-9)
प्रश्न 4: मूसा ने किस चट्टान से पानी निकाला था?
उत्तर: होरेब पर्वत की चट्टान से। (गिनती 20:8-11)
प्रश्न 5: इस्राएलियों ने बिन्यामीन के पुत्र बालाक से लड़ने के लिए किसे बुलाया?
उत्तर: बालाम नामक भविष्यद्वक्ता को। (गिनती 22:5)
व्यवस्थाविवरण (Deuteronomy)
प्रश्न 1: व्यवस्थाविवरण का क्या अर्थ है?
उत्तर: “दूसरी बार व्यवस्था देना।”
प्रश्न 2: मूसा ने इस पुस्तक में किससे विदाई भाषण दिया?
उत्तर: इस्राएली लोगों से।
प्रश्न 3: परमेश्वर ने किससे कहा कि वे मूसा के बाद नेतृत्व करें?
उत्तर: यहोशू से। (व्यवस्थाविवरण 31:23)
प्रश्न 4: परमेश्वर ने क्यों कहा कि इस्राएली मूर्तियों की पूजा न करें?
उत्तर: क्योंकि वह एक जलानेवाली आग और जलनशील परमेश्वर है। (व्यवस्थाविवरण 4:24)
प्रश्न 5: परमेश्वर ने कौन सा पहला और सबसे बड़ा आज्ञा दी?
उत्तर: “तू अपने संपूर्ण मन, संपूर्ण प्राण और संपूर्ण शक्ति से यहोवा अपने परमेश्वर से प्रेम कर।” (व्यवस्थाविवरण 6:5)
यहोशू (Joshua)
प्रश्न 1: यहोशू को किसने इस्राएलियों का अगुवा बनाया?
उत्तर: परमेश्वर ने मूसा के बाद यहोशू को चुना। (यहोशू 1:1-2)
प्रश्न 2: यहोशू और इस्राएली लोगों ने यरीहो नगर की दीवारों को कैसे गिराया?
उत्तर: उन्होंने सात दिन तक नगर के चारों ओर परिक्रमा की, और सातवें दिन नरसिंगे फूंकने और जयजयकार करने से दीवारें गिर गईं। (यहोशू 6:15-20)
प्रश्न 3: गिबोनियों ने यहोशू और इस्राएलियों को कैसे धोखा दिया?
उत्तर: उन्होंने पुराने कपड़े और फटे हुए जूते पहनकर यह दिखाया कि वे दूर के देश से आए हैं और इस्राएल से शांति संधि करवा ली। (यहोशू 9:3-15)
प्रश्न 4: यहोशू ने कितने वर्ष इस्राएलियों का नेतृत्व किया?
उत्तर: लगभग 25 वर्ष।
प्रश्न 5: यहोशू की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर अपने वचनों को पूरा करता है और अपने लोगों को विजय देता है।
न्यायियों (Judges)
प्रश्न 1: इस्राएलियों ने कितनी बार परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया?
उत्तर: कई बार, और हर बार परमेश्वर ने एक न्यायी (शासक) उठाया।
प्रश्न 2: सबसे पहला न्यायी कौन था?
उत्तर: ओतनिएल। (न्यायियों 3:9-11)
प्रश्न 3: किस न्यायी ने अपनी शक्ति खो दी क्योंकि उसके बाल काट दिए गए?
उत्तर: शिमशोन। (न्यायियों 16:17-19)
प्रश्न 4: कौन सी महिला न्यायी थी?
उत्तर: दिबोरा। (न्यायियों 4:4)
प्रश्न 5: न्यायियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: जब इस्राएली परमेश्वर से दूर जाते, तो उन्हें दंड मिलता, और जब वे पश्चाताप करते, तो परमेश्वर उन्हें बचाता।
रूत (Ruth)
प्रश्न 1: रूत कौन थी?
उत्तर: एक मोआबी महिला, जो अपनी सास नाओमी के साथ इस्राएल में आ गई।
प्रश्न 2: रूत का पति कौन था?
उत्तर: बोअज़। (रूत 4:13)
प्रश्न 3: रूत ने नाओमी के साथ क्या प्रतिज्ञा की?
उत्तर: “तेरा लोग मेरा लोग, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।” (रूत 1:16)
प्रश्न 4: रूत का वंशावली में कौन सा महत्वपूर्ण स्थान है?
उत्तर: वह राजा दाऊद की परदादी थी। (रूत 4:17)
प्रश्न 5: रूत की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर किसी भी जाति के व्यक्ति को अपने अनुग्रह में शामिल कर सकता है।
1 शमूएल (1 Samuel)
प्रश्न 1: शमूएल की माँ कौन थी, जिसने उसे परमेश्वर को समर्पित किया?
उत्तर: हन्ना। (1 शमूएल 1:10-11)
प्रश्न 2: परमेश्वर ने किसे इस्राएल का पहला राजा बनाया?
उत्तर: शाऊल को। (1 शमूएल 10:1)
प्रश्न 3: दाऊद ने गोलियत को कैसे हराया?
उत्तर: एक गुलेल और एक पत्थर से। (1 शमूएल 17:49-50)
प्रश्न 4: शाऊल ने क्यों अपना राज्य खो दिया?
उत्तर: उसने परमेश्वर की आज्ञाओं की अवहेलना की। (1 शमूएल 15:22-23)
प्रश्न 5: 1 शमूएल की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर दिल को देखता है, न कि केवल बाहरी रूप को।
2 शमूएल (2 Samuel)
प्रश्न 1: 2 शमूएल की शुरुआत में कौन राजा बना?
उत्तर: दाऊद। (2 शमूएल 2:4)
प्रश्न 2: दाऊद ने किस नगर को अपनी राजधानी बनाया?
उत्तर: यरूशलेम। (2 शमूएल 5:6-7)
प्रश्न 3: दाऊद ने किसके विरुद्ध पाप किया और नाथान भविष्यद्वक्ता ने उसे दोषी ठहराया?
उत्तर: बतशेबा और उसके पति ऊरिय्याह के विरुद्ध। (2 शमूएल 12:1-9)
प्रश्न 4: दाऊद का कौन सा पुत्र उसके विरुद्ध विद्रोह कर मारा गया?
उत्तर: अबशालोम। (2 शमूएल 18:14-15)
प्रश्न 5: 2 शमूएल की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर दयालु है, लेकिन वह पाप का दंड भी देता है।
1 राजा (1 Kings)
प्रश्न 1: दाऊद के बाद इस्राएल का राजा कौन बना?
उत्तर: सुलेमान। (1 राजा 2:12)
प्रश्न 2: सुलेमान ने परमेश्वर से क्या माँगा?
उत्तर: ज्ञान और समझ। (1 राजा 3:9-12)
प्रश्न 3: सुलेमान ने कौन सा प्रसिद्ध भवन बनवाया?
उत्तर: यरूशलेम में परमेश्वर का मंदिर। (1 राजा 6:1)
प्रश्न 4: किस कारण से इस्राएल दो भागों में बंट गया?
उत्तर: सुलेमान के पुत्र रहूबियाम की कठोर नीति के कारण। (1 राजा 12:16-20)
प्रश्न 5: 1 राजा की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर आज्ञाकारियों को आशीष देता है और अविश्वासियों को न्याय करता है।
2 राजा (2 Kings)
प्रश्न 1: एलिय्याह भविष्यद्वक्ता को परमेश्वर ने कैसे स्वर्ग में उठाया?
उत्तर: एक अग्निमय रथ और बवंडर के द्वारा। (2 राजा 2:11)
प्रश्न 2: एलिशा ने कौन सा चमत्कार किया जिससे एक व्यक्ति का कुल्हाड़ी का फलता पानी में तैरने लगा?
उत्तर: उसने लकड़ी का टुकड़ा पानी में डाला। (2 राजा 6:6)
प्रश्न 3: इस्राएल और यहूदा पर किसने आक्रमण किया और उन्हें बंदी बना लिया?
उत्तर: अस्सूरियों ने इस्राएल को और बाबिलियों ने यहूदा को। (2 राजा 17:6, 25:1-12)
प्रश्न 4: 2 राजा की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर के न्याय और करुणा का प्रदर्शन।
1 इतिहास (1 Chronicles)
प्रश्न 1: 1 इतिहास की पुस्तक मुख्य रूप से किसके वंशवृक्ष और शासन पर केंद्रित है?
उत्तर: इस्राएली जनजातियों और राजा दाऊद पर। (1 इतिहास 1-29)
प्रश्न 2: कौन सा व्यक्ति मंदिर निर्माण की योजना लेकर आया लेकिन इसे पूरा नहीं कर सका?
उत्तर: राजा दाऊद। (1 इतिहास 28:2-3)
प्रश्न 3: 1 इतिहास की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर अपनी वाचा को बनाए रखता है।
2 इतिहास (2 Chronicles)
प्रश्न 1: कौन सा राजा अपने ज्ञान और समृद्धि के लिए प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर: सुलेमान। (2 इतिहास 1:11-12)
प्रश्न 2: यहूदा का कौन सा राजा मंदिर की मरम्मत और धार्मिक सुधार के लिए जाना जाता है?
उत्तर: योशिय्याह। (2 इतिहास 34:1-33)
प्रश्न 3: बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा को कब नष्ट किया?
उत्तर: 586 ईसा पूर्व। (2 इतिहास 36:17-19)
प्रश्न 4: 2 इतिहास की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर अपने लोगों को आशीष देता है जब वे उसकी आज्ञा मानते हैं।
एज्रा (Ezra)
प्रश्न 1: एज्रा की पुस्तक में कौन सी महत्वपूर्ण घटना वर्णित है?
उत्तर: बाबुल की बंधुआई के बाद यहूदी लोगों की यरूशलेम वापसी और मंदिर का पुनर्निर्माण। (एज्रा 1:1-3)
प्रश्न 2: एज्रा कौन था?
उत्तर: एक याजक और धर्मशास्त्री। (एज्रा 7:6)
प्रश्न 3: एज्रा की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर अपने लोगों को पुनर्स्थापित करता है जब वे पश्चाताप करते हैं।
नहेमायाह (Nehemiah)
प्रश्न 1: नहेमायाह ने कौन सा कार्य किया?
उत्तर: यरूशलेम की टूटी हुई शहरपनाह का पुनर्निर्माण किया। (नहेमायाह 2:17)
प्रश्न 2: यहूदियों को यरूशलेम में वापस लाने और शहरपनाह बनाने के लिए नहेमायाह को किस राजा ने अनुमति दी?
उत्तर: फारस के राजा अर्तक्षत्र। (नहेमायाह 2:1-8)
प्रश्न 3: नहेमायाह की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर अपने लोगों को उनके विश्वास और भक्ति के अनुसार आशीष देता है।
एस्तेर (Esther)
प्रश्न 1: एस्तेर कौन थी?
उत्तर: फारस की यहूदी रानी। (एस्तेर 2:17)
प्रश्न 2: एस्तेर ने अपने लोगों को किस बुरे व्यक्ति से बचाया?
उत्तर: हामान। (एस्तेर 7:6-10)
प्रश्न 3: यहूदियों की रक्षा के लिए एस्तेर ने क्या किया?
उत्तर: राजा के सामने जाकर प्रार्थना और अनुग्रह की याचना की। (एस्तेर 5:1-8)
प्रश्न 4: एस्तेर की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर अपने लोगों को उनकी कठिनाइयों में बचाता है।
अय्यूब (Job)
प्रश्न 1: अय्यूब कौन था?
उत्तर: एक धर्मी और ईश्वरीय व्यक्ति। (अय्यूब 1:1)
प्रश्न 2: अय्यूब पर कौन सी परीक्षाएँ आईं?
उत्तर: उसने अपना परिवार, धन और स्वास्थ्य खो दिया। (अय्यूब 1:13-19, 2:7)
प्रश्न 3: परमेश्वर ने अय्यूब को किस प्रकार से पुनर्स्थापित किया?
उत्तर: उसकी सभी संपत्ति और आशीष को दोगुना कर दिया। (अय्यूब 42:10-17)
प्रश्न 4: अय्यूब की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर कठिनाइयों में भी विश्वासयोग्यता को महत्व देता है।
भजन संहिता (Psalms)
प्रश्न 1: भजन संहिता की अधिकांश रचनाएँ किसने की?
उत्तर: राजा दाऊद।
प्रश्न 2: भजन संहिता 23 का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: परमेश्वर हमारा चरवाहा है। (भजन संहिता 23:1)
प्रश्न 3: भजन संहिता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: स्तुति, प्रार्थना और परमेश्वर की महिमा।
2. नीतिवचन की पुस्तक (Proverbs):
प्रश्न 1: नीतिवचन 1:7 के अनुसार, ज्ञान का मूल क्या है?
उत्तर: “यहोवा का भय ज्ञान का मूल है।”
प्रश्न 2: नीतिवचन 3:5-6 हमें किस पर भरोसा रखने की शिक्षा देता है?
उत्तर: “यहोवा पर सम्पूर्ण मन से भरोसा रखो, और अपनी समझ का सहारा न लो।”
प्रश्न 3: नीतिवचन 15:1 के अनुसार, कोमल उत्तर का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर: “कोमल उत्तर क्रोध को शांत करता है।”
प्रश्न 4: नीतिवचन 31 में किसका वर्णन किया गया है?
उत्तर: “गुणी स्त्री” का वर्णन, जो अपने परिवार और समाज के लिए आदर्श होती है।
1. सभोपदेशक की पुस्तक (Ecclesiastes):
प्रश्न 1: सभोपदेशक की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: जीवन की व्यर्थता और परमेश्वर के प्रति भय का महत्व।
प्रश्न 2: सभोपदेशक 1:2 में उपदेशक क्या कहता है?
उत्तर: “सब कुछ व्यर्थ है।”
प्रश्न 3: सभोपदेशक 3:1 के अनुसार, हर बात का क्या होता है?
उत्तर: “हर बात का एक समय होता है।”
प्रश्न 4: सभोपदेशक 12:13 में उपदेशक का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
उत्तर: “परमेश्वर का भय मानना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना ही मनुष्य का संपूर्ण कर्तव्य है।”
श्रेष्ठगीत (Song of Solomon):
प्रश्न 1: श्रेष्ठगीत का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: प्रेम और विवाह।
प्रश्न 2: श्रेष्ठगीत किसका संवाद है?
उत्तर: सुलेमान और उसकी प्रेमिका का।
प्रश्न 3: श्रेष्ठगीत की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर का प्रेम उसके लोगों के प्रति।
विलापगीत की पुस्तक (Lamentations):
प्रश्न 1: विलापगीत की पुस्तक किसकी दु:खभरी कविताओं का संग्रह है?
उत्तर: यिर्मयाह नबी द्वारा यरूशलेम के विनाश पर शोकगीत।
प्रश्न 2: विलापगीत 3:22-23 में परमेश्वर की कौन सी विशेषता का उल्लेख है?
उत्तर: “उसकी करुणा कभी समाप्त नहीं होती; वे प्रत्येक सुबह नई होती हैं।”
प्रश्न 3: विलापगीत 5:21 में यिर्मयाह किसके लिए प्रार्थना करते हैं?
उत्तर: “हमें अपनी ओर फिरा ले, हे यहोवा, और हम फिर से बहाल होंगे।”
प्रश्न 4: विलापगीत की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यरूशलेम के विनाश पर शोक व्यक्त करना और परमेश्वर की दया और करुणा की याद दिलाना।
यशायाह की पुस्तक (Isaiah):
प्रश्न 1: यशायाह नबी का मुख्य संदेश क्या था?
उत्तर: इस्राएल के पापों के लिए न्याय और भविष्य में मसीहा के माध्यम से उद्धार की भविष्यवाणी।
प्रश्न 2: यशायाह 7:14 में किसका जन्म भविष्यवाणी की गई है?
उत्तर: “कुँवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी, उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा।”
प्रश्न 3: यशायाह 53 में किसके दुखों का वर्णन है?
उत्तर: पीड़ित सेवक के रूप में मसीहा के दुखों का वर्णन।
प्रश्न 4: यशायाह 40:31 के अनुसार, जो यहोवा पर आशा रखते हैं, उन्हें क्या प्राप्त होता है?
उत्तर: “वे नए बल प्राप्त करते हैं, वे उकाबों की नाईं पंखों से उड़ेंगे।”
यिर्मयाह की पुस्तक (Jeremiah):
प्रश्न 1: यिर्मयाह नबी को किस नाम से भी जाना जाता है?
उत्तर: “रोता हुआ नबी”।
प्रश्न 2: यिर्मयाह 1:5 में परमेश्वर ने यिर्मयाह से क्या कहा?
उत्तर: “मैं ने तुझे गर्भ में रचने से पहले ही तुझे जान लिया।”
प्रश्न 3: यिर्मयाह 29:11 में परमेश्वर की क्या योजना है?
उत्तर: “तुम्हारी कुशलता के विचार हैं, न कि हानि के, ताकि तुम्हें भविष्य और आशा प्रदान करूँ।”
प्रश्न 4: यिर्मयाह की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस्राएल की अवज्ञा के लिए चेतावनी देना और पश्चाताप के लिए बुलाना।
विलापगीत की पुस्तक (Lamentations):
प्रश्न 1: विलापगीत की पुस्तक किसकी दु:खभरी कविताओं का संग्रह है?
उत्तर: यिर्मयाह नबी द्वारा यरूशलेम के विनाश पर शोकगीत।
प्रश्न 2: विलापगीत 3:22-23 में परमेश्वर की कौन सी विशेषता का उल्लेख है?
उत्तर: “उसकी करुणा कभी समाप्त नहीं होती; वे प्रत्येक सुबह नई होती हैं।”
प्रश्न 3: विलापगीत 5:21 में यिर्मयाह किसके लिए प्रार्थना करते हैं?
उत्तर: “हमें अपनी ओर फिरा ले, हे यहोवा, और हम फिर से बहाल होंगे।”
प्रश्न 4: विलापगीत की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यरूशलेम के विनाश पर शोक व्यक्त करना और परमेश्वर की दया और करुणा की याद दिलाना।
यहेजकेल की पुस्तक (Ezekiel):
प्रश्न 1: यहेजकेल नबी को कौन से प्रमुख दर्शन दिए गए थे?
उत्तर: परमेश्वर की महिमा, सूखी हड्डियों की घाटी, और नए मंदिर का दर्शन।
प्रश्न 2: यहेजकेल 1:4-28 में कौन सा असाधारण दृश्य वर्णित है?
उत्तर: यहेजकेल ने स्वर्गीय रथ और चार मुखों वाले जीवों का दर्शन किया।
प्रश्न 3: यहेजकेल 37:1-14 में “सूखी हड्डियों की घाटी” का क्या अर्थ है?
उत्तर: इस्राएल की आत्मिक और राष्ट्रीय पुनर्स्थापना का प्रतीक।
प्रश्न 4: यहेजकेल 36:26 में परमेश्वर ने इस्राएल को क्या प्रतिज्ञा दी?
उत्तर: “मैं तुम्हें नया मन दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा डालूँगा।”
दानिय्येल की पुस्तक (Daniel):
प्रश्न 1: दानिय्येल को किस कारण से सिंहों की माँद में डाला गया था?
उत्तर: उसने राजा के आदेश के विरुद्ध परमेश्वर से प्रार्थना की थी।
प्रश्न 2: दानिय्येल 2 में नबूकदनेस्सर का सपना क्या दर्शाता है?
उत्तर: भविष्य के राज्यों का चित्रण, जो मसीह के राज्य द्वारा प्रतिस्थापित होगा।
प्रश्न 3: दानिय्येल 3 में कौन से तीन व्यक्ति आग की भट्टी में फेंके गए?
उत्तर: शद्रक, मेशक, और अबेदनगो।
प्रश्न 4: दानिय्येल 7:13-14 में “मानव पुत्र” कौन है?
उत्तर: यीशु मसीह, जिसे अनन्त राज्य दिया गया है।
होशे की पुस्तक (Hosea):
प्रश्न 1: होशे नबी के जीवन से परमेश्वर कौन सा संदेश देना चाहता था?
उत्तर: इस्राएल की बेवफाई के बावजूद परमेश्वर की अटूट प्रेमभरी करुणा।
प्रश्न 2: होशे 4:6 में परमेश्वर ने इस्राएल के लिए क्या कहा?
उत्तर: “मेरा प्रजा ज्ञान के अभाव में नष्ट हो गई।”
प्रश्न 3: होशे 6:6 के अनुसार, परमेश्वर को बलिदान से अधिक क्या प्रिय है?
उत्तर: “दया और परमेश्वर की पहिचान।”
प्रश्न 4: होशे की पत्नी गोमेर किसका प्रतीक थी?
उत्तर: इस्राएल की बेवफाई और परमेश्वर की अनुग्रहकारी पुनर्स्थापना।
योएल की पुस्तक (Joel):
प्रश्न 1: योएल की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: “प्रभु का दिन” और पवित्र आत्मा का उण्डेला जाना।
प्रश्न 2: योएल 2:28-29 में किस भविष्यद्वाणी का उल्लेख है?
उत्तर: “मैं अपनी आत्मा सब प्राणियों पर उण्डेलूँगा।” (प्रेरितों के काम 2 में पूरी हुई)
प्रश्न 3: योएल 2:12-13 में पश्चाताप का संदेश क्या है?
उत्तर: “अपने हृदय को फाड़ो, न कि अपने वस्त्रों को।”
प्रश्न 4: योएल 3:14 में कौन सा महत्वपूर्ण संदर्भ दिया गया है?
उत्तर: “निर्णय की तराई” का वर्णन, जहाँ परमेश्वर न्याय करेगा।
आमोस की पुस्तक (Amos):
प्रश्न 1: आमोस कौन था, और उसने किसके विरुद्ध भविष्यवाणी की?
उत्तर: आमोस एक गड़ेरिया था, जिसने इस्राएल की बुराइयों और अन्याय के विरुद्ध भविष्यवाणी की।
प्रश्न 2: आमोस 5:24 में परमेश्वर क्या चाहता है?
उत्तर: “न्याय को जलधारा और धर्म को महानदी की धारा के समान बहने दो।”
प्रश्न 3: आमोस 7:14-15 में आमोस ने अपने बारे में क्या कहा?
उत्तर: “मैं न तो नबी था, न नबियों का चेला, मैं तो गड़ेरिया और गूलर के पेड़ों का तोड़नेवाला था।”
प्रश्न 4: आमोस की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस्राएल को उसके अन्याय, मूर्तिपूजा और पाखंड के लिए चेतावनी देना।
ओबद्याह की पुस्तक (Obadiah):
प्रश्न 1: ओबद्याह ने किस राष्ट्र के खिलाफ भविष्यवाणी की?
उत्तर: एदोम के खिलाफ।
प्रश्न 2: ओबद्याह 1:3 में एदोम के पाप के रूप में क्या बताया गया है?
उत्तर: “तेरे मन का अहंकार तुझे धोखा दे गया।”
प्रश्न 3: ओबद्याह की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: एदोम का विनाश और इस्राएल की पुनर्स्थापना।
प्रश्न 4: ओबद्याह की पुस्तक कितने अध्यायों की है?
उत्तर: यह बाइबल की सबसे छोटी भविष्यवाणी पुस्तक है, जिसमें केवल एक अध्याय है।
योना की पुस्तक (Jonah):
प्रश्न 1: योना को परमेश्वर ने कहाँ जाने का आदेश दिया था?
उत्तर: नीनवे।
प्रश्न 2: योना ने परमेश्वर की आज्ञा से भागने के लिए क्या किया?
उत्तर: वह याफा से तरशीश की ओर एक जहाज में सवार हो गया।
प्रश्न 3: योना 2:1-10 में योना ने कहाँ से प्रार्थना की?
उत्तर: मछली के पेट से।
प्रश्न 4: नीनवे के लोगों ने कैसे प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: वे पश्चाताप करने लगे और परमेश्वर की दया प्राप्त की।
मीका की पुस्तक (Micah):
प्रश्न 1: मीका 5:2 में किसका उल्लेख किया गया है?
उत्तर: “बेतलेहम” से आने वाले एक राजा (यीशु मसीह) की भविष्यवाणी।
प्रश्न 2: मीका 6:8 में परमेश्वर मनुष्य से क्या चाहता है?
उत्तर: “न्याय करना, दया से प्रेम रखना, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चलना।”
प्रश्न 3: मीका 7:18 में परमेश्वर की कौन सी विशेषता बताई गई है?
उत्तर: “वह अपराध को क्षमा करता है और अनुग्रह से परिपूर्ण है।”
प्रश्न 4: मीका की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: न्याय, दया और मसीहा के राज्य की आशा।
नहूम की पुस्तक (Nahum):
प्रश्न 1: नहूम की भविष्यवाणी किस राष्ट्र के विरुद्ध थी?
उत्तर: नीनवे (असीरिया की राजधानी) के विरुद्ध।
प्रश्न 2: नहूम 1:7 में परमेश्वर के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “यहोवा भला है, संकट के दिन वह शरणस्थान है, और जो उस पर भरोसा रखते हैं, उनकी वह सुधि लेता है।”
प्रश्न 3: नहूम 3:5-7 में नीनवे का क्या परिणाम बताया गया है?
उत्तर: परमेश्वर उसके विनाश की घोषणा करता है, और कोई उसे बचाने वाला नहीं होगा।
प्रश्न 4: नहूम की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: न्यायी परमेश्वर, जो दुष्टों का नाश करता है और अपने लोगों को छुड़ाता है।
हबक्कूक की पुस्तक (Habakkuk):
प्रश्न 1: हबक्कूक ने परमेश्वर से कौन सा मुख्य प्रश्न पूछा?
उत्तर: “हे यहोवा, तू कब तक अन्याय को सहन करेगा?”
प्रश्न 2: हबक्कूक 2:4 में क्या महत्वपूर्ण सत्य सिखाया गया है?
उत्तर: “धर्मी विश्वास से जीवित रहेगा।”
प्रश्न 3: हबक्कूक 3 में नबी ने क्या प्रार्थना की?
उत्तर: परमेश्वर से पुनः अपने कार्य को प्रकट करने की प्रार्थना।
प्रश्न 4: हबक्कूक की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: विश्वास के द्वारा जीने की आवश्यकता और परमेश्वर का न्याय अवश्य आएगा।
सपन्याह की पुस्तक (Zephaniah):
प्रश्न 1: सपन्याह 1:14-18 में किस दिन का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: “यहोवा का दिन” – एक न्याय और दंड का दिन।
प्रश्न 2: सपन्याह 2:3 में परमेश्वर के लोगों को क्या करने के लिए कहा गया है?
उत्तर: “यहोवा को ढूंढो, न्याय और दीनता को ढूंढो।”
प्रश्न 3: सपन्याह 3:17 में परमेश्वर का कौन सा अद्भुत गुण प्रकट होता है?
उत्तर: “यहोवा तेरे बीच में वीर उद्धारकर्ता है, वह तुझ से आनंद करेगा।”
प्रश्न 4: सपन्याह की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यहोवा का न्याय और भविष्य में इस्राएल की बहाली।
हाग्गै की पुस्तक (Haggai):
प्रश्न 1: हाग्गै की पुस्तक में मुख्य समस्या क्या थी?
उत्तर: इस्राएलियों का परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण को अनदेखा करना।
प्रश्न 2: हाग्गै 1:4 में परमेश्वर ने किस बात के लिए डांटा?
उत्तर: “क्या यह समय है कि तुम अपने सजे हुए घरों में रहते रहो, जब यहोवा का भवन उजाड़ पड़ा है?”
प्रश्न 3: हाग्गै 2:9 में मंदिर के भविष्य के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “इस घर की महिमा पिछली की अपेक्षा बड़ी होगी।”
प्रश्न 4: हाग्गै की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमेश्वर के कार्य को प्राथमिकता देने और उसकी आशीष प्राप्त करने की प्रेरणा।
जकर्याह की पुस्तक (Zechariah):
प्रश्न 1: जकर्याह की पुस्तक में कितने दर्शन दिए गए?
उत्तर: आठ विशेष दर्शन।
प्रश्न 2: जकर्याह 9:9 में किसका संदर्भ दिया गया है?
उत्तर: यीशु मसीह का गदहे पर यरूशलेम में प्रवेश (मत्ती 21:5)।
प्रश्न 3: जकर्याह 4:6 में परमेश्वर ने किस सिद्धांत को बताया?
उत्तर: “न तो शक्ति से, न सामर्थ्य से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा।”
प्रश्न 4: जकर्याह की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: इस्राएल की बहाली, मसीहा का आगमन, और भविष्य की महिमा।
मलाकी की पुस्तक (Malachi):
प्रश्न 1: मलाकी 3:10 में परमेश्वर ने क्या चुनौती दी?
उत्तर: “दसमांश लाओ और देखो कि मैं आकाश के झरोखे खोल कर आशीषों की वर्षा करता हूँ या नहीं।”
प्रश्न 2: मलाकी 4:5 में किस भविष्यवक्ता के आने की बात कही गई है?
उत्तर: “एलिय्याह नबी” (यह भविष्य में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के रूप में पूरा हुआ)।
प्रश्न 3: मलाकी की पुस्तक में कौन से मुख्य दोष उजागर किए गए?
उत्तर: याजकों की उदासीनता, विवाह में विश्वासघात, और लोगों की निष्ठाहीनता।
प्रश्न 4: मलाकी की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यहोवा की न्यायसंगत अपेक्षाएँ और उसके अनुग्रह से लौटने का आह्वान।
1. मत्ती की पुस्तक (Gospel of Matthew)
प्रश्न 1: मत्ती का सुसमाचार किस प्रकार के पाठकों के लिए लिखा गया था?
उत्तर: मुख्यतः यहूदी पाठकों के लिए, ताकि वे मसीह को उनके प्रतिज्ञात राजा के रूप में पहचान सकें।
प्रश्न 2: मत्ती 5-7 में कौन सा प्रसिद्ध उपदेश दिया गया है?
उत्तर: पहाड़ी उपदेश (Sermon on the Mount)।
प्रश्न 3: मत्ती 28:19-20 में यीशु ने अपने शिष्यों को क्या आदेश दिया?
उत्तर: “जाकर सब जातियों को चेला बनाओ, उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और जो कुछ मैंने तुम्हें सिखाया, वह सब मानने की शिक्षा दो।”
प्रश्न 4: मत्ती की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यीशु मसीह ही प्रतिज्ञात राजा और उद्धारकर्ता हैं।
2. मरकुस की पुस्तक (Gospel of Mark)
प्रश्न 1: मरकुस का सुसमाचार किसके लिए लिखा गया था?
उत्तर: मुख्यतः गैर-यहूदी (रोमी) पाठकों के लिए।
प्रश्न 2: मरकुस 10:45 में यीशु ने अपने उद्देश्य के बारे में क्या कहा?
उत्तर: “मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा की जाए, परन्तु इसलिये आया कि वह स्वयं सेवा करे और बहुतों के छुटकारे के लिए अपना प्राण दे।”
प्रश्न 3: मरकुस की पुस्तक में यीशु के जीवन का कौन सा पक्ष विशेष रूप से प्रकट होता है?
उत्तर: उनकी सेवकाई और सामर्थ्यपूर्ण कार्य।
प्रश्न 4: मरकुस की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यीशु मसीह सेवक राजा हैं, जो संसार के उद्धार के लिए आए।
3. लूका की पुस्तक (Gospel of Luke)
प्रश्न 1: लूका ने अपना सुसमाचार किसे समर्पित किया?
उत्तर: थीयुफिलुस नामक व्यक्ति को (लूका 1:3)।
प्रश्न 2: लूका 19:10 में यीशु ने अपने मिशन को कैसे वर्णित किया?
उत्तर: “मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उद्धार करने आया है।”
प्रश्न 3: लूका के सुसमाचार की विशेषता क्या है?
उत्तर: यह सबसे विस्तृत और ऐतिहासिक रूप से व्यवस्थित सुसमाचार है।
प्रश्न 4: लूका की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यीशु मसीह संपूर्ण मानवजाति के उद्धारकर्ता हैं।
4. यूहन्ना की पुस्तक (Gospel of John)
प्रश्न 1: यूहन्ना 1:1 में यीशु के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन ही परमेश्वर था।”
प्रश्न 2: यूहन्ना 3:16 का क्या संदेश है?
उत्तर: “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”
प्रश्न 3: यूहन्ना 14:6 में यीशु ने अपने बारे में क्या कहा?
उत्तर: “मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं आ सकता।”
प्रश्न 4: यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यीशु मसीह परमेश्वर के पुत्र हैं, और उन पर विश्वास करने से अनन्त जीवन मिलता है।
5. प्रेरितों के काम (Acts of the Apostles)
प्रश्न 1: प्रेरितों के काम की पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर: लूका ने।
प्रश्न 2: प्रेरितों 1:8 में यीशु ने शिष्यों से क्या प्रतिज्ञा की?
उत्तर: “तुम पवित्र आत्मा से सामर्थ्य पाकर यरूशलेम, सारे यहूदिया और सामरिया में और पृथ्वी के छोर तक मेरे गवाह होगे।”
प्रश्न 3: प्रेरितों 2 में पिन्तेकुस्त के दिन क्या हुआ?
उत्तर: पवित्र आत्मा शिष्यों पर उतरा और वे अन्य भाषाओं में बोलने लगे।
प्रश्न 4: प्रेरितों के काम की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से कलीसिया की स्थापना और सुसमाचार का प्रचार।
6. रोमियों की पुस्तक (Epistle to the Romans)
प्रश्न 1: रोमियों की पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर: प्रेरित पौलुस ने।
प्रश्न 2: रोमियों 3:23 में पाप के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “क्योंकि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।”
प्रश्न 3: रोमियों 6:23 में पाप के परिणाम और परमेश्वर के वरदान के बारे में क्या बताया गया है?
उत्तर: “क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्त जीवन है।”
प्रश्न 4: रोमियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: उद्धार केवल विश्वास के द्वारा, अनुग्रह से, यीशु मसीह में प्राप्त होता है।
7. 1 कुरिन्थियों की पुस्तक (1 Corinthians)
प्रश्न 1: कुरिन्थियों की पुस्तक क्यों लिखी गई थी?
उत्तर: कुरिन्थ की कलीसिया में अनैतिकता, विभाजन और आत्मिक वरदानों के दुरुपयोग को संबोधित करने के लिए।
प्रश्न 2: 1 कुरिन्थियों 13 अध्याय में किस विषय पर चर्चा की गई है?
उत्तर: प्रेम (Love)। इसे “प्रेम का अध्याय” भी कहा जाता है।
प्रश्न 3: 1 कुरिन्थियों 15 में कौन सा महत्वपूर्ण विषय वर्णित है?
उत्तर: यीशु मसीह के पुनरुत्थान का महत्व।
प्रश्न 4: 1 कुरिन्थियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीही जीवन में पवित्रता, एकता और प्रेम आवश्यक है।
8. 2 कुरिन्थियों की पुस्तक (2 Corinthians)
प्रश्न 1: 2 कुरिन्थियों की पुस्तक किस उद्देश्य से लिखी गई थी?
उत्तर: पौलुस ने अपनी प्रेरिताई की पुष्टि करने और कलीसिया को सांत्वना देने के लिए लिखी थी।
प्रश्न 2: 2 कुरिन्थियों 5:17 में नए जीवन के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “इसलिए यदि कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है; पुरानी बातें बीत गईं, देखो, सब कुछ नया हो गया है।”
प्रश्न 3: 2 कुरिन्थियों 12:9 में परमेश्वर के अनुग्रह के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “मेरा अनुग्रह तेरे लिए काफी है, क्योंकि मेरी शक्ति निर्बलता में सिद्ध होती है।”
प्रश्न 4: 2 कुरिन्थियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीही सेवकाई में धैर्य, विश्वास और अनुग्रह की आवश्यकता है।
9. गलातियों की पुस्तक (Galatians)
प्रश्न 1: गलातियों की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: यहूदी नियमों से स्वतंत्रता और विश्वास द्वारा उद्धार को स्पष्ट करना।
प्रश्न 2: गलातियों 2:16 में उद्धार के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, परन्तु यीशु मसीह में विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है।”
प्रश्न 3: गलातियों 5:22-23 में कौन-से आत्मा के फल बताए गए हैं?
उत्तर: प्रेम, आनंद, शांति, धीरज, कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम।
प्रश्न 4: गलातियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीही जीवन अनुग्रह और विश्वास पर आधारित है, न कि व्यवस्था के कार्यों पर।
10. इफिसियों की पुस्तक (Ephesians)
प्रश्न 1: इफिसियों की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: कलीसिया मसीह की देह है और उसमें एकता तथा आत्मिक आशीषें हैं।
प्रश्न 2: इफिसियों 2:8-9 में उद्धार के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “क्योंकि अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, विश्वास के द्वारा; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का वरदान है। यह कर्मों के द्वारा नहीं, कि कोई घमण्ड करे।”
प्रश्न 3: इफिसियों 6:10-18 में किस विषय पर चर्चा की गई है?
उत्तर: परमेश्वर के संपूर्ण हथियारों (Armor of God) के बारे में।
प्रश्न 4: इफिसियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीही विश्वासी को आत्मिक रूप से मजबूत रहना चाहिए और एकता में चलना चाहिए।
11. फिलिप्पियों की पुस्तक (Philippians)
प्रश्न 1: फिलिप्पियों की पुस्तक को किसके लिए लिखा गया था?
उत्तर: फिलिप्पियों की कलीसिया के लिए।
प्रश्न 2: फिलिप्पियों 4:4 में कौन-सी आज्ञा दी गई है?
उत्तर: “प्रभु में सदा आनंदित रहो; फिर भी कहता हूँ, आनंदित रहो।”
प्रश्न 3: फिलिप्पियों 2:5-8 में यीशु मसीह के किस गुण पर प्रकाश डाला गया है?
उत्तर: उनकी दीनता और आज्ञाकारिता।
प्रश्न 4: फिलिप्पियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीही जीवन में आनंद और विनम्रता का महत्व।
12. कुलुस्सियों की पुस्तक (Colossians)
प्रश्न 1: कुलुस्सियों की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: मसीह की पूर्णता और सर्वोच्चता को समझाना।
प्रश्न 2: कुलुस्सियों 1:15-17 में मसीह के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “वह अदृश्य परमेश्वर का स्वरूप और सारी सृष्टि में पहिलौठा है।”
प्रश्न 3: कुलुस्सियों 3:2 में किस पर ध्यान देने को कहा गया है?
उत्तर: “अपना ध्यान पृथ्वी की नहीं, बल्कि स्वर्गीय बातों पर लगाओ।”
प्रश्न 4: कुलुस्सियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यीशु मसीह ही सब बातों में सर्वोच्च हैं, और हमें उसमें जड़ पकड़ी हुई और स्थिर रहनी चाहिए।
13. 1 थिस्सलुनीकियों की पुस्तक (1 Thessalonians)
प्रश्न 1: 1 थिस्सलुनीकियों की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: मसीही विश्वासियों को आत्मिक दृढ़ता, पवित्रता और मसीह के पुनरागमन के लिए तैयार करना।
प्रश्न 2: 1 थिस्सलुनीकियों 4:16-17 में प्रभु के पुनरागमन के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “क्योंकि प्रभु आप स्वर्ग से ऊँचे शब्द और प्रधान दूत के शब्द और परमेश्वर की तुरही के साथ उतरेगा; और जो मसीह में मरे हैं, वे पहले जी उठेंगे। फिर हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिए जाएँगे।”
प्रश्न 3: 1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18 में मसीही जीवन के लिए कौन-से निर्देश दिए गए हैं?
उत्तर: “सर्वदा आनन्दित रहो, निरंतर प्रार्थना करते रहो, हर बात में धन्यवाद करो।”
प्रश्न 4: 1 थिस्सलुनीकियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीह के पुनरागमन की आशा में हमें पवित्र और जागरूक रहना चाहिए।
14. 2 थिस्सलुनीकियों की पुस्तक (2 Thessalonians)
प्रश्न 1: 2 थिस्सलुनीकियों की पुस्तक क्यों लिखी गई थी?
उत्तर: मसीह के पुनरागमन के बारे में गलतफहमी दूर करने और धैर्य बनाए रखने के लिए।
प्रश्न 2: 2 थिस्सलुनीकियों 2:3-4 में किसके बारे में चेतावनी दी गई है?
उत्तर: अधर्म के व्यक्ति (Antichrist) के बारे में।
प्रश्न 3: 2 थिस्सलुनीकियों 3:10 में काम करने के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “यदि कोई काम न करे, तो खाने भी न पाए।”
प्रश्न 4: 2 थिस्सलुनीकियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: हमें धैर्यपूर्वक मसीह के पुनरागमन की प्रतीक्षा करनी चाहिए और निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए।
15. 1 तीमुथियुस की पुस्तक (1 Timothy)
प्रश्न 1: 1 तीमुथियुस की पुस्तक किसके लिए लिखी गई थी?
उत्तर: तीमुथियुस के लिए, जो एक युवा पास्टर था।
प्रश्न 2: 1 तीमुथियुस 4:12 में युवा मसीही सेवकों के लिए कौन-सा निर्देश दिया गया है?
उत्तर: “कोई तेरी जवानी को तुच्छ न समझे, परन्तु तू विश्वासियों के लिए वचन, चालचलन, प्रेम, विश्वास और पवित्रता में आदर्श बन।”
प्रश्न 3: 1 तीमुथियुस 6:10 में धन के प्रेम के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “क्योंकि सब प्रकार की बुराइयों की जड़ धन का प्रेम है।”
प्रश्न 4: 1 तीमुथियुस की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: एक पास्टर को पवित्रता, ज्ञान और सही शिक्षा का पालन करना चाहिए।
16. 2 तीमुथियुस की पुस्तक (2 Timothy)
प्रश्न 1: 2 तीमुथियुस की पुस्तक किस परिस्थिति में लिखी गई थी?
उत्तर: पौलुस ने इसे अपने अंतिम दिनों में, कैद के दौरान लिखा था।
प्रश्न 2: 2 तीमुथियुस 3:16-17 में पवित्रशास्त्र के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “सारी पवित्रशास्त्र की पुस्तक परमेश्वर की प्रेरणा से रची गई है और उपदेश, ताड़ना, सुधार, और धर्म की शिक्षा के लिए लाभदायक है।”
प्रश्न 3: 2 तीमुथियुस 4:7 में पौलुस ने अपनी सेवा के बारे में क्या कहा?
उत्तर: “मैंने अच्छी कुश्ती लड़ी है, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास को बनाए रखा है।”
प्रश्न 4: 2 तीमुथियुस की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: विश्वास की दौड़ पूरी करने के लिए हमें अंत तक दृढ़ रहना चाहिए।
17. तीतुस की पुस्तक (Titus)
प्रश्न 1: तीतुस कौन था?
उत्तर: एक युवा सेवक, जिसे पौलुस ने क्रेते की कलीसिया में नियुक्त किया था।
प्रश्न 2: तीतुस 2:11-12 में अनुग्रह के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह सब मनुष्यों के उद्धार के लिए प्रगट हुआ है, जो हमें यह शिक्षा देता है कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेर कर संयम, धर्म और भक्ति के साथ इस वर्तमान संसार में जीवन बिताएँ।”
प्रश्न 3: तीतुस की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: कलीसिया में नेतृत्व और पवित्रता के लिए दिशा-निर्देश देना।
प्रश्न 4: तीतुस की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीही सेवकों को पवित्र और शिक्षाप्रद जीवन जीना चाहिए।
18. फिलेमोन की पुस्तक (Philemon)
प्रश्न 1: फिलेमोन की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: क्षमा और प्रेम।
प्रश्न 2: इस पुस्तक में किस दास का उल्लेख है?
उत्तर: ओनेसिमुस, जो पहले एक भगोड़ा दास था।
प्रश्न 3: पौलुस ने फिलेमोन से क्या अनुरोध किया?
उत्तर: कि वह ओनेसिमुस को एक भाई के रूप में स्वीकार करे।
प्रश्न 4: फिलेमोन की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीह में प्रेम और क्षमा की शक्ति।
19. इब्रानियों की पुस्तक (Hebrews)
प्रश्न 1: इब्रानियों की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: यहूदी मसीही विश्वासियों को यीशु मसीह में स्थिर रहने और मूसा व्यवस्था की तुलना में नए नियम की श्रेष्ठता को समझाने के लिए लिखा गया था।
प्रश्न 2: इब्रानियों 11 को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: “विश्वास का अध्याय” (Hall of Faith)।
प्रश्न 3: इब्रानियों 4:12 में परमेश्वर के वचन को किस प्रकार वर्णित किया गया है?
उत्तर: “क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, प्रभावशाली और हर एक दोधारी तलवार से भी तीव्र है।”
प्रश्न 4: इब्रानियों 12:1-2 में मसीही जीवन को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: एक दौड़ के समान, जिसमें हमें धैर्यपूर्वक यीशु की ओर ताकते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
प्रश्न 5: इब्रानियों की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यीशु मसीह नया और श्रेष्ठ महायाजक हैं, और हमें उनके द्वारा परमेश्वर के साथ संबंध बनाए रखना चाहिए।
20. याकूब की पुस्तक (James)
प्रश्न 1: याकूब की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: विश्वास और कर्मों का संतुलन।
प्रश्न 2: याकूब 1:5 में ज्ञान पाने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर: “यदि तुम में से किसी में बुद्धि की घटी हो तो वह परमेश्वर से माँगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है।”
प्रश्न 3: याकूब 2:26 में विश्वास और कर्मों के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “जिस प्रकार शरीर आत्मा बिना मरा हुआ होता है, वैसे ही विश्वास भी कर्मों के बिना मरा हुआ है।”
प्रश्न 4: याकूब की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: सच्चा विश्वास केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में प्रकट होता है।
21. 1 पतरस की पुस्तक (1 Peter)
प्रश्न 1: 1 पतरस की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: सताव झेल रहे मसीही विश्वासियों को प्रोत्साहित करना।
प्रश्न 2: 1 पतरस 1:7 में विश्वास की परीक्षा को किससे तुलना किया गया है?
उत्तर: सोने की शुद्धि से।
प्रश्न 3: 1 पतरस 5:8 में शैतान को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: “वह गरजने वाले सिंह के समान घूमता है, इस खोज में कि किसे निगल जाए।”
प्रश्न 4: 1 पतरस की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: हमें हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा रखना चाहिए और पवित्र जीवन जीना चाहिए।
22. 2 पतरस की पुस्तक (2 Peter)
प्रश्न 1: 2 पतरस की पुस्तक क्यों लिखी गई थी?
उत्तर: झूठे शिक्षकों और मसीह के पुनरागमन के बारे में सिखाने के लिए।
प्रश्न 2: 2 पतरस 3:9 में प्रभु के धैर्य के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “प्रभु अपने वचन के पूरा करने में विलंब नहीं करता, जैसा कुछ लोग विलंब समझते हैं, पर वह तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता कि कोई नाश हो, पर यह कि सबको मन फिराव का अवसर मिले।”
प्रश्न 3: 2 पतरस की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: झूठी शिक्षाओं से सावधान रहना और मसीह के पुनरागमन की प्रतीक्षा करना।
23. 1 यूहन्ना की पुस्तक (1 John)
प्रश्न 1: 1 यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: प्रेम, सत्य और परमेश्वर के साथ संगति।
प्रश्न 2: 1 यूहन्ना 1:9 में पापों की क्षमा के लिए क्या वादा किया गया है?
उत्तर: “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह विश्वासयोग्य और धर्मी है, कि हमारे पाप क्षमा करे और हमें सब अधर्म से शुद्ध करे।”
प्रश्न 3: 1 यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मसीह में सच्चा प्रेम और परमेश्वर के साथ चलने का महत्व।
24. 2 यूहन्ना की पुस्तक (2 John)
प्रश्न 1: 2 यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: प्रेम और सच्चाई में बने रहना।
प्रश्न 2: 2 यूहन्ना 1:6 में प्रेम को कैसे परिभाषित किया गया है?
उत्तर: “प्रेम यह है कि हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलें।”
प्रश्न 3: 2 यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: हमें मसीही सत्य में बने रहना चाहिए और झूठे शिक्षकों से बचना चाहिए।
25. 3 यूहन्ना की पुस्तक (3 John)
प्रश्न 1: 3 यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: गैयस को प्रोत्साहित करना और दियुत्रिफेस की गलतियों को इंगित करना।
प्रश्न 2: 3 यूहन्ना 1:11 में भलाई और बुराई के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: “जो भलाई करता है, वह परमेश्वर से उत्पन्न है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा।”
प्रश्न 3: 3 यूहन्ना की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: सच्चे विश्वासियों को प्रोत्साहित करना और अहंकारी नेताओं से सावधान रहना।
26. यहूदा की पुस्तक (Jude)
प्रश्न 1: यहूदा की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: झूठे शिक्षकों के विरुद्ध चेतावनी।
प्रश्न 2: यहूदा 1:3 में किसके लिए संघर्ष करने को कहा गया है?
उत्तर: “एक बार पवित्र लोगों को सौंपे गए विश्वास के लिए।”
प्रश्न 3: यहूदा की पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: हमें विश्वास में दृढ़ रहना चाहिए और झूठी शिक्षाओं से सावधान रहना चाहिए।
27. प्रकाशितवाक्य की पुस्तक (Book of Revelation)
प्रश्न 1: प्रकाशितवाक्य की पुस्तक का लेखक कौन है?
उत्तर: प्रेरित यूहन्ना।
प्रश्न 2: प्रकाशितवाक्य किस द्वीप पर लिखी गई थी?
उत्तर: पतमोस द्वीप पर।
प्रश्न 3: प्रकाशितवाक्य की पुस्तक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: अंतिम दिनों की घटनाओं, यीशु मसीह के पुनरागमन, न्याय और स्वर्गीय राज्य का प्रकाशन करना।
प्रश्न 4: प्रकाशितवाक्य 1:8 में यीशु मसीह को किस प्रकार वर्णित किया गया है?
उत्तर: “मैं अल्फा और ओमेगा हूँ, जो था, जो है, और जो आनेवाला है, सर्वशक्तिमान।”
प्रश्न 5: प्रकाशितवाक्य अध्याय 2 और 3 में कितनी कलीसियाओं को संदेश दिए गए हैं?
उत्तर: सात कलीसियाओं को।
प्रश्न 6: प्रकाशितवाक्य 5:5 में यीशु को किस उपाधि से संबोधित किया गया है?
उत्तर: “यहूदा के गोत्र का सिंह।”
प्रश्न 7: प्रकाशितवाक्य में वर्णित सात मुहरों (Seven Seals) का क्या महत्व है?
उत्तर: ये पृथ्वी पर न्याय और परमेश्वर की योजना के क्रमबद्ध उद्घाटन का प्रतीक हैं।
प्रश्न 8: प्रकाशितवाक्य 13 में किस रहस्यमयी संख्या का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: 666, जो मसीह-विरोधी (Antichrist) की पहचान मानी जाती है।
प्रश्न 9: प्रकाशितवाक्य 19 में यीशु मसीह के दूसरे आगमन को किस रूप में वर्णित किया गया है?
उत्तर: एक विजयी राजा के रूप में, जो सफेद घोड़े पर बैठा है और “राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु” कहलाता है।
प्रश्न 10: प्रकाशितवाक्य 20 में हज़ार वर्षों के राज्य (Millennial Kingdom) का क्या उल्लेख है?
उत्तर: यीशु मसीह हज़ार वर्षों तक राज्य करेंगे, और इसके बाद अंतिम न्याय होगा।
प्रश्न 11: प्रकाशितवाक्य 21-22 में परमेश्वर की अंतिम योजना क्या है?
उत्तर: एक नया स्वर्ग और नई पृथ्वी, जिसमें कोई दुःख, आँसू या मृत्यु नहीं होगी, और परमेश्वर अपने लोगों के साथ सदा के लिए निवास करेगा।
प्रश्न 12: प्रकाशितवाक्य 22:12 में यीशु मसीह ने क्या प्रतिज्ञा की?
उत्तर: “देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ, और प्रत्येक को उसके काम के अनुसार बदला दूँगा।”
प्रश्न 13: प्रकाशितवाक्य की पुस्तक का अंतिम संदेश क्या है?
उत्तर: “हाँ, मैं शीघ्र आता हूँ।” (प्रकाशितवाक्य 22:20)