जब आत्मा उतरता है तो क्या बदलाव आते हैं || How the Spirit of the Lord Changes the Life.

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पवित्र आत्मा का सामर्थ क्या है और ये कैसा होता है। यहोवा का आत्मा कैसे उतरता है। क्या होता है जब पवित्र आत्मा का सामर्थ आता है। इस प्रकार के सवाल यदि आपके पास भी हैँ और आपको उनका उत्तर नहीं मिला तो उस लेख में हम देखेंगे की बाइबल में नए व पुराने नियम में जब जब यहोवा का आत्मा लोगों पर उतरा तब उनमें और परीस्थिति में क्या बदलाव आए। 

पुराना नियम

ओथनीएल : ओथनीएल को इस्राएल का नेतृत्व करने और युद्ध में विजय प्राप्त करने की शक्ति मिली।

उस में यहोवा का आत्मा समाया, और वह इस्राएलियों का न्यायी बन गया, और लड़ने को निकला, और यहोवा ने अराम के राजा कूशत्रिशातैम को उसके हाथ में कर दिया; और वह कूशत्रिशातैम पर जयवन्त हुआ। तब चालीस वर्ष तक देश में शान्ति बनी रही। न्यायियों 3:10

गिदोन : गिदोन को इस्राएल के दुश्मनों के खिलाफ साहस और अधिकार मिला।

तब यहोवा का आत्मा गिदोन में समाया; और उसने नरसिंगा फूंका, तब अबीएजेरी उसकी सुनने के लिये इकट्ठे हुए। न्यायियों 6:34

येफ्था : येफ्था को अम्मोनियों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिली।

तब यहोवा का आत्मा यिप्तह में समा गया, और वह गिलाद और मनश्शे से हो कर गिलाद के मिस्पे में आया, और गिलाद के मिस्पे से हो कर अम्मोनियों की ओर चला। न्यायियों 11:29

सैमसन : सैमसन को अद्वितीय शक्ति मिली जिससे वह अपने दुश्मनों को पराजित कर सका।

तब यहोवा का आत्मा उस पर बल से उतरा, और उसने अश्कलोन को जा कर वहां के तीस पुरूषों को मार डाला, और उनका धन लूटकर तीस जोड़े कपड़ों को पकेली के बताने वालों को दे दिया। तब उसका क्रोध भड़का, और वह अपने पिता के घर गया।” न्यायियों 14:19 

तब यहोवा का आत्मा उस पर बलपूर्वक उतरा, और उसने सिंह को इस प्रकार फाड़ डाला जैसे कोई बकरी के बच्चे को फाड़ डालता है। पर उसने अपने माता-पिता को नहीं बताया कि उसने क्या किया था।” न्यायियों 14:6

“जब वह लही के पास पहुँचा, तो पलिश्ती उसकी ओर ललकारते हुए आए। तब यहोवा का आत्मा उस पर बलपूर्वक उतरा, और उसके हाथों पर बंधी रस्सियाँ जलते सन की तरह हो गईं और उसके बंधन उसके हाथों से गिर पड़े।” न्यायियों 15:14

शाऊल : शाऊल का रूपांतरण हुआ और उसने भविष्यवाणी करना शुरू किया।

1 शमूएल 10:6: “यहोवा का आत्मा बलपूर्वक तुझ पर उतरेगा, और तू उनके साथ भविष्यवाणी करेगा; और तू एक नया व्यक्ति बन जाएगा।” 1 शमूएल 10:6

“जब शाऊल ने उनकी बातें सुनीं, तो परमेश्वर का आत्मा उस पर बलपूर्वक उतरा, और वह क्रोध से जल उठा।” 1 शमूएल 11:6

दाऊद : दाऊद को इस्राएल के राजा के रूप में उसकी भविष्य की भूमिका के लिए सशक्त किया गया।

“तब शमूएल ने तेल से भरा सींग लिया और उसके भाइयों के बीच में उसका अभिषेक किया, और उस दिन से यहोवा का आत्मा दाऊद पर बलपूर्वक उतरा। शमूएल फिर रामाह को चला गया।” 1 शमूएल 16:13

“जब शाऊल ने उनकी बातें सुनीं, तो परमेश्वर का आत्मा उस पर बलपूर्वक उतरा, और वह क्रोध से जल उठा।” 1 शमूएल 11:6

अजर्याह: अजर्याह को राजा आसा और लोगों को परमेश्वर की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित करने का साहस और बुद्धि मिली।

तब परमेश्वर का आत्मा ओदेद के पुत्र अजर्याह में समा गया, और वह आसा से भेंट करने निकला, और उस से कहा, हे आसा, और हे सारे यहूदा और बिन्यामीन मेरी सुनो, जब तक तुम यहोवा के संग रहोगे तब तक वह तुम्हारे संग रहेगा; और यदि तुम उसकी खोज में लगे रहो, तब तो वह तुम से मिला करेगा, परन्तु यदि तुम उसको त्याग दोगे तो वह भी तुम को त्याग देगा। 2 इतिहास 15:1-2

जकर्याह: जकर्याह को लोगों को भविष्यवाणी के रूप में चेतावनी देने की शक्ति मिली।

“तब यहोवा का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह पर उतरा। वह लोगों के सामने खड़ा हुआ और कहा, ‘परमेश्वर ऐसा कहता है: तुम क्यों यहोवा की आज्ञाओं का उल्लंघन करते हो? तुम समृद्ध नहीं होगे। क्योंकि तुमने यहोवा को त्याग दिया है, उसने तुम्हें त्याग दिया है।'” 2 इतिहास 24:20

नया नियम

एलीशिबा : एलीशिबा को आनन्द और भविष्यवाणी की समझ मिली।

“जब एलीशिबा  ने मरियम का अभिवादन सुना, तो बच्चा उसके गर्भ में उछल पड़ा, और एलिज़ाबेथ पवित्र आत्मा से भर गई।लूका 1:41

जकर्याह (यूहन्ना बपतिस्ता के पिता): जकर्याह ने मसीहा के आगमन और अपने पुत्र की भूमिका के बारे में भविष्यवाणी की।

“और उसका पिता जकरयाह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गया, और भविष्यद्ववाणी करने लगा।” लूका 1:67

यीशु: यीशु को उनकी सेवा शुरू करने के लिए आत्मा ने मार्गदर्शन किया।

“फिर यीशु पवित्रआत्मा से भरा हुआ, यरदन से लैटा; और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उस की परीक्षा करता रहा।” लूका 4:1

“प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं। और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष का प्रचार करूं।” लूका 4:18
यीशु को प्रचार, चंगाई और बंधनों में पड़े लोगों को मुक्त करने के लिए अभिषेक किया गया।

पिन्तेकुस्त (शिष्य): शिष्यों को विभिन्न भाषाओं में बोलने की शक्ति मिली और उन्होंने अपनी वैश्विक सेवा शुरू की।

“और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे॥” प्रेरितों के काम 2:4

“तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर उन से कहा। हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ।” प्रेरितों के काम 4:8

पतरस: पतरस को अधिकारियों के सामने सुसमाचार सुनाने का दिलेरी और हियाव मिला।

“तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर उन से कहा। हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ।” प्रेरितों के काम 4:8

स्तेफनुस: स्तेफनुस को स्वर्ग का दर्शन और शहादत का सामना करने की शक्ति मिली।

“उस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर स्वर्ग की ओर देखा और परमेश्वर की महिमा को और यीशु को परमेश्वर की दाहिनी ओर खड़ा देखकर। कहा; देखों, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं।” प्रेरितों के काम 7:55

पौलुस: शाऊल को चंगा किया गया, पवित्र आत्मा से भरा गया और वह प्रेरित पौलुस में बदल गया।

“तब हनन्याह उठकर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात यीशु, जो उस रास्ते में, जिस से तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है, कि तू फिर दृष्टि पाए और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए।” प्रेरितों के काम 9:17

बाइबल के अनुसार पवित्र आत्मा के पाए जाने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है: 

1. यीशु मसीह पर विश्वास करें।
2. पश्चाताप करें और बपतिस्मा लें।
3. परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करें।
4. प्रार्थना करें और पवित्र आत्मा के लिए विनती करें।
5. अभिषिकतों व प्रेरितों के द्वारा हाथ रखने के द्वारा प्राप्त करें।
6. एकता में रहें और सामूहिक प्रार्थना में सम्मिलित हों।
7. परमेश्वर की इच्छा को गंभीरता से खोजें।
8. एक पवित्र जीवन जिएं।
9. यीशु के वचन को स्वीकारें और विश्वास करें।

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